कर्णप्रयाग। डिम्मर गांव में आयोजित रामलीला के चौथे दिन के मंचन में महाराजा दशरथ कुल गुरु वशिष्ठ और सभासदों के साथ मंत्रणा कर श्रीराम के राज्याभिषेक की सलाह लेकर राज तिलक की तैयारी शुरू करने की आज्ञा देते हैं। इसका पता जब दासी मंथरा को चलता है तो वह महारानी कैकेयी के कक्ष में जाकर उनको भ्रमित करती हैं। कैकेयी मंथरा की बातों में आकर श्रीराम को चौदह साल का वनवास और भरत को राजगद्दी सौंपने का वरदान मांगती हैं। पिता की आज्ञा लेकर राम सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास पर चले जाते हैं।आयोजन में रामलीला मंडली के अध्यक्ष अशोक डिमरी, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी, मोहन प्रसाद डिमरी, गणेश चंद्र खंडूड़ी, गोवर्द्धन प्रसाद, बुद्धि बल्लभ डिमरी और ग्राम प्रधान विनीता डिमरी आदि मौजूद रहे। संवाद
दस दिनों तक होगा माता जानकी रसोई का संचालन
कर्णप्रयाग। श्रीबदरीनाथ धाम के डिमरी पुजारियों के ग्राम डिम्मर में रामलीला मंचन के दौरान आयोजकों की ओर से दस दिनों तक माता जानकी रसोई का संचालन किया जाता है। यहां रामलीला मंचन से पूर्व सभी श्रद्धालु सात्विक भोजन ग्रहण कर रामलीला देखने पहुंचते हैं। वहीं सिमली, विद्यापीठ आवासीय बस्ती, सैंण, भभराड़ी आदि स्थानों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कमेटी की ओर से वाहन की व्यवस्थाएं भी की हुई हैं। श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक डिमरी ने बताया कि 108 वर्षों से अनवरत रूप से गांव में श्रीरामलीला मंचन का आयोजन होता है और श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। संवाद