नगर पंचायत पोखरी के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में चुनाव के दौरान नामांकन में झूठा शपथ पत्र देने पर अब बर्खास्तगी की तलवार लटकने की संभावना बन गई है। इस मामले में प्रदेश के शहरी विकास विभाग के सचिव शैलेश बगौली की ओर से नगर पंचायत अध्यक्ष को भेजे नोटिस में एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
वर्ष 2018 के नवंबर माह में हुए नगर निकाय चुनाव में नगर पंचायत पोखरी से लक्ष्मी प्रसाद पंत ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। चुनाव में हार का सामना करने वाले कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश प्रसाद भट्ट ने शासन और शहरी विकास विभाग में शिकायत की थी कि लक्ष्मी प्रसाद पंत ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है, लेकिन नामांकन में उन्होंने झूठा शपथ पत्र दाखिल कर भूमि का कोई जिक्र नहीं किया है। लिहाजा इनका नामांकन रद्द किया जाए, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जगदीश भट्ट ने सूचना अधिकार के तहत लक्ष्मी प्रसाद पंत के नामांकन की प्रति हासिल कर नामांकन को उच्च न्यायालय नैनीताल में चुनौती दी। न्यायालय ने मामले में शासन को जांच के आदेश दिए। इसके बावजूद भी मामला ठंडे बस्ते में रहा। जगदीश भट्ट ने इसी वर्ष दोबारा न्यायालय में मामले को उठाया, तब जाकर शासन की ओर मामले में दिलचस्पी ली गई। बीती पांच फरवरी को शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली की ओर से नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि राज्य सरकार की भूमि के खसरा नंबर 384 पर अतिक्रमण की शिकायत सत्य पाई गई है। क्यों न आपके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए। इस मामले में अध्यक्ष से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए भी कहा गया है।
सरकारी भूमि पर अतिक्रमण से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। अतिक्रमण वाली भूमि में मेरा कोई निर्माण नहीं किया हुआ है। मुझे बिना वजह बदनाम किया जा रहा है। मुझे शहरी विकास विभाग से कोई नोटिस भी नहीं मिला है, लेकिन सोशल मीडिया पर नोटिस की प्रति वायरल हो रही है। इसकी जांच करवाई जाएगी।
-लक्ष्मी प्रसाद पंत