जोशीमठ के ज्योर्तिमठ में धर्मध्वजा फहराते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने जोशीमठ में ज्योर्तिमठ (शंकराचार्य मठ) में धर्मध्वजा फहराकर मठ के संचालन का पदभार ग्रहण किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित जोशीमठ सनातन धर्म की चार राजधानियों में से उत्तर राजधानी है। इसी के अनुरूप इसका विकास होना चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ज्योतिष्पीठाधीश्वर और द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य हैं। वे लंबे समय से जोशीमठ में रहते हैं और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य पीठों का भ्रमण भी करते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि समूचा उत्तराखंड देवभूमि है। यहां की आध्यात्मिकता को बनाए रखने, संस्कृति व परंपराओं को संरक्षित करने के लिए सबके सहयोग से कार्य किया जाएगा।