चमोली जिले में 105 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं। कहीं भवन की छत टपक रही है, तो कहीं प्लास्टर का मलबा कमरों में गिर रहा है। कहीं दीवारों में दरारें पड़ी है, तो कहीं परिसर में जलभराव हो रहा है। इस स्थिति में बरसात में कक्षाओं का सुचारु रूप से संचालन चुनौती बना हुआ है। दर्जनों स्कूलों में बारिश होने पर छुट्टी करनी पड़ रही है, जबकि कई स्कूल खुले आसमान के नीचे चल रहे हैं।
जिले में 938 प्राथमिक विद्यालय भवनों में से 23, जूनियर और माध्यमिक स्तर के 401 में से 82 विद्यालय भवन जीर्णशीर्ण बने हैं। घाट ब्लॉक में जूनियर हाईस्कूल चौफुलाकोट बंगाली का विद्यालय भवन कभी भी ढह सकता है। भवन की छत क्षतिग्रस्त होने से यहां बरसात में कक्षाएं संचालित करने में खतरा बना हुआ है। प्राथमिक विद्यालय बंगाली के भवन में भी कई जगह दरारें पड़ी हैं। पोखरी, जोशीमठ, दशोली, नारायणबगड़, थराली, देवाल, गैरसैंण, कर्णप्रयाग और गौचर क्षेत्र में भी कई विद्यालय भवन मरम्मत नहीं होने से जीर्णशीर्ण हालत में हैं। छात्र-छात्राएं जर्जर भवनों में ही पढ़ाई को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग पिछले दो वर्षों से शासन से बजट आवंटन की इंतजार कर रहा है।
भूस्खलन की चपेट में जीआईसी गोदली
गोपेश्वर। पोखरी क्षेत्र में राजकीय इंटर कालेज गोदली का भवन और रास्ता भूस्खलन की चपेट में है। यहां स्कूल परिसर में भी दरारें पड़ गई हैं। बरसात में छात्र-छात्राएं खतरे के साये में पढ़ने को मजबूर हैं। वर्ष 2017 में स्कूल परिसर के निचले हिस्से में हापला-धोतीधार मोटर मार्ग का निर्माण हुआ था। उसके बाद से यहां भूस्खलन हो रहा है। लोनिवि ने वर्ष 2018 के जून में भूस्खलन क्षेत्र में कुछ सुधारीकरण कार्य किया था, लेकिन यह कार्य एक माह भी नहीं टिका। शिक्षक धन सिंह घरिया का कहना है कि भारी बारिश में विद्यालय संचालन करना मुश्किल बना हुआ है। विद्यालय गेट से लेकर भवन खतरे की जद में आ गए हैं।
बजट की कमी होने से विद्यालय भवनों की मरम्मत नहीं कर पा रहे थे। इस बार जिला योजना के तहत प्रारंभिक शिक्षा को 3.12 करोड़ और माध्यमिक शिक्षा को 3.70 करोड़ का बजट स्वीकृत हो गया है। जल्द ही प्राथमिकता वाले विद्यालय भवनों की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। बरसात के मौसम को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन को जर्जर स्कूलों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
-ललित मोहन चमोला, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चमोली