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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज, जश्न के लिए सजे मंदिर

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11 अगस्त को मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। कोटद्वार की दुकानें श्रीकृष्ण के रंग में रंगी हुई हैं। श्रद्धालु अपने घरों में भगवान की पूजा अर्चना करने के लिए श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की मूर्तियां और उनके श्रृंगार का सामान खरीदने के लिए बाजारों में उमड़े रहे।
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कोरोना संक्रमण के फैलने की आशंका को देखते हुए इस बार प्रशासन ने कोटद्वार के मंदिरों और मंदिर परिसरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर झांकियां निकालने और सजाने की इजाजत नहीं दी है। मंदिरों में सामान्य सजावट की जाएगी। लोगों ने भी मंदिर की भीड़ से बचने के लिए अपने घरों में ही लड्डू गोपाल स्थापित कर उसकी पूजा अर्चना करने का मन बनाया है। गोखले मार्ग के दुकानदार तुषार अग्रवाल और गौरव गर्ग ने बताया कि उनकी दुकान में भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप की अनेक प्रकार की मूर्तियां और उनकी सजावट का सामान उपलब्ध है। लोग सुबह से ही बड़ी संख्या में अपनी पसंद की मूर्ति और भगवान के श्रृंगार का सामान खरीदने में जुटे रहे। गोविंदनगर स्थित गीता भवन मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रामप्रकाश शर्मा ने बताया कि इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में मंदिर के बाहर झांकियां नहीं सजाई जाएंगी।
कर्णप्रयाग। पंडित गणेश खंडूड़ी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखकर भगवान कृष्ण की पूजा करें। भगवान को मक्खन, मिश्री, दूध, दही, शहद, घी का भोग लगाएं। पूजा के समय भगवान की बांसुरी पूजा स्थल पर रखें। रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव पर शंख व घंटी वादन करें।
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चंबा (टिहरी)। सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पर्व हषोल्लास से मनाया जाता है। मंदिरों में लड्डू गोपाल के आने के लिए सीमित रूप में पालना सजाने की तैयारियां की जा रही है। कोरोना महामारी के कारण लोगों ने अपने घरों पर ही मुरली वाले के पूजन और उपवास की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मंगलवार की मध्य रात में कान्हा के जन्म होने पर दूध, दही, शहद, शक्कर और देशी घी से लड्डू गोपाल की मूर्ति का अभिषेक करते हैं। उसके बाद गंगाजल से मूर्ति का स्नान कराते हैं। भगवान के अभिषेक पंचामृत और प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण को ग्वाला भी कहते हैं, उन्हें गोवंश से बड़ा प्रेम था, इसीलिए इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए गाय की पूजा और उन्हें चारा दिया जाता है।
श्री बदरीनाथ धाम में सादगी से मनाई जायेगी जन्माष्टमी
जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में जन्माष्टमी हर साल धूमधाम से मनाई जाती है। कई झांकियां निकाली जाती हैं, लेकिन इस साल इसको सादगी के साथ मनाया जाएगा। धाम के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म समय ठीक रात्रि 12 बजे का है इस तरह जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनाई जाएगी।
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