घाट ब्लाक में आपदा के एक माह बाद भी जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा है। आधा दर्जन मोटर मार्ग अब भी बाधित पड़े हुए हैं। कई गांवों में धूप खिलने के साथ ही जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे मकानों और खेती को खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन की टीम गांवों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर चुकी है, लेकिन अभी तक सुरक्षा या बचाव के कोई उपाय नहीं किये गए हैं।
घाट ब्लाक विगत एक जुलाई को बादल फटने से भारी तबाही मची थी। क्षेत्र के बंगाली, भेंटी, वादुक, जाखणी, विजार, नारंगी, बांसवाड़ा, लांखी, सरपाणी, पेरी, तल्ला मोख, चोपड़ाकोट, चरी, माणखी, फाली सेंती, कनोली, कांडा, भैंसवाडा और घिंघराण गांवों में एक माह गुजर जाने के बाद भी जनजीवन अस्त व्यस्त है।
करीब आधा दर्जन मोटर मार्ग बाधित पड़े हुए हैं। साथ ही गांवों में पैदल रास्ते और पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त हैं। लोगों को बारिश थमने से कुछ राहत तो मिली लेकिन अब एक नई मुसीबत आ खड़ी हुई है। कई गांवों में धूप खिलने के साथ ही जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे गांवों में आवासीय मकानों के साथ ही कृषि भूमि को खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय निवासी देव सिंह नेगी, नंदन सिंह रावत, दिनेश सिंह नेगी, दलवीर सिंह और देवेंद्र सिंह का कहना है कि गांवों में जमीन खिसक रही है, जिससे गांवों को खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि दरारों को रोकने के लिए जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह दरारें बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती हैं।