बदरीनाथ धाम के मुख्य पड़ाव पांडुकेश्वर में चल रही रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। राजा जनक के दरबार में उपस्थित कई राजा जब धनुष तोड़ने में विफल रहे तब रामचंद्र उठे और धनुष को एक झटके में तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने सीता को वरमाला पहनाई। वहीं धनुष टूटने की खबर मिलते ही परशुराम राजा जनक के दरबार में पहुंच गए। जब उन्हें श्रीराम की ओर से धनुष टूटने की बात पता चली तो वह क्रोधित हो गए। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद हुआ। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पांडुकेश्वर पहुंचे थे।