फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओडर गांव में उल्टी दस्त से सात साल की बच्ची की मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्लॉक के ओडर गांव में सोमवार को उल्टी-दस्त सेे सात साल की बच्ची की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि लोनिवि की ओर से लगाई गई हाइड्रोलिक ट्रॉली के ऑपरेटर के समय पर न आने से बच्ची को जल्दी से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। अगर ऑपरेटर समय से आ जाता तो उसकी जान बच जाती।
विज्ञापन

बीडीसी मेंबर पान सिंह गड़िया व नरेंद्र सिंह ने बताया कि ओडर गांव की आवाजाही के लिए बनाई अस्थायी पुलिया बह चुकी है। ऐसे में लोगों को ट्रॉली से ही आवाजाही करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि ओडर गांव की काजल (7) पुत्री नरेंद्र सिंह की रविवार रात को अचानक तबियत खराब हो गई। परिजन सोमवार सुबह 6 बजे काजल को अस्पताल पहुंचाने के लिए पिंडर नदी पर लगी ट्रॉली के पास लाए लेकिन वहां संचालक नहीं था। परिजनों ने फोन पर ट्रॉली संचालक को मौके पर पहुंचने को कहा इसके बाद भी वह लगभग नौ बजे पहुंचा। तब तक काजल का स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया था। फिर ग्रामीण उसे 108 से पीएचसी देवाल लाए, जहां डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। कहा कि तीन घंटे काजल गंभीर स्थिति में ट्रॉली के पास पड़ी रही और परिजन ऑपेरटर का इंतजार करते रहे। अगर समय पर ट्रॉली संचालक आ जाता तो काजल की जान बच जाती। शिकायत पर एसडीएम सुधीर कुमार, लोनिवि के ईई सतवीर ने मौके का निरीक्षण किया। एसडीएम ने लोनिवि को ट्रॉली नियमित रूप से संचालित करने को कहा।
सुबह आठ बजे का है आदेश
लोनिवि के ईई सतवीर ने कहा कि शासनादेश में ट्रॉली को सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक ही चलाने के आदेश हैं और कहीं इमरजेंसी सेवा देने का जिक्र नहीं है। साथ ही शासनादेश में 15 जून के बाद ही बरसात में ट्रॉली चलाने का आदेश है। इसके बाद भी विभाग ट्रॉली चला रहा है। वहीं ट्रॉली संचालन गांव से आठ किमी दूर रहता है
विज्ञापन

गांव भेजी टीम
देवाल। ओडर सहित अन्य कई गांवों में लोग बुखार और खांसी से पीड़ित हैं। बीडीसी मेंबर पान सिंह ने बताया कि गांव में बुखार से पीड़ित लोगों की सूचना विभाग को देने के बाद भी कोई नहीं पहुंचा। वहीं देवाल अस्पताल के डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि ओडर सहित कई गांवों में लोग बुखार, खांसी आदि बीमारी से पीड़ित होने की सूचना है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में दवा देने व सैंपल लेने के लिए टीम भेज दी है।
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------
इमरजेंसी में ट्रॉली के संचालन का नहीं है आदेश
आपदा में बहा ओडर का झूला पुल आज तक नहीं बना, ट्रॉली ही है सहारा
ग्रामीणों की ओर से बनाई गई अस्थायी पुलिया भी कुछ दिन पूर्व बह गई
यशवंत बडियारी
देवाल। ओडर गांव के लिए लगी हाइड्रोलिक ट्रॉली अगर छह बजे शुरू हो जाती तो काजल समय से अस्पताल पहुंच जाती और उसकी जान बच जाती। वर्ष 2013 की आपदा में ओडर झूला पूल बह गया था। ग्रामीणों की ओर से यहां पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाई गई थी, जो कुछ दिनों पहले बारिश के कारण बह गई। लोनिवि की ओर ये यहां आने जाने के लिए हाइड्रोलिक ट्रॉली लगाई गई है। इस ट्रॉली के नियमित रूप से देखरेख नहीं होने से कई बार लोग इसमें फंस जाते हैं। तो कई बार ट्रॉली संचालक आदेश के अनुरूप सुबह नौ बजे पहुंचता है। इमरजेंसी में यहां की सेवाएं नहंी हैं।
ग्रामीणों की ओर से कई बार लोनिवि से यहां इमरजेंसी में भी सेवा देने की मांग की गई, लेकिन विभाग का कहना कि शाम आठ बजे के बाद इसके संचालन का आदेश नहीं है। अचानक गंभीर रूप से बीमार को भी सुबह आठ-नौ बजे का इंतजार करना पड़ता है। काजल के पिता नरेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार रात को काजल का स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया, लेकिन ट्रॉली आपरेटर के मौके पर नहीं होने से उसे रात को अस्पताल नहीं ले जा पाए। सुबह भी तीन घंटे ट्रॉली के संचालन का इंतजार करना पड़ा। अगर ट्रॉली संचालक समय से आ जाता तो काजल की जान बच जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें