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लोगों को गहरे जख्म दे गई ऋषि गंगा की आपदा

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रैणी में ऋषि गंगा में लगे मलबे के ढेर। यहां अभी भी कई शव दफन हैं। - फोटो : GOPESHWAR
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ऋषिगंगा की आपदा कई लोगों को गहरे जख्म दे गई है। प्रभावित परिवारों को अब लापता लोगों के शवों के अंतिम दर्शनों का इंतजार है।
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आपदा में 205 लोग लापता हो गए थे, जिनमें से ऋत्विक कंपनी के 21, ऋत्विक की सहयोगी कंपनी के 94, एचसीसी के 3, ओम मेटल के 21, तपोवन गांव के दो, रिंगी गांव के दो, ऋषि गंगा कंपनी के 53, करछों गांव के दो और रैैणी गांव के 6 लोग शामिल हैं। ऋषिगंगा पावर हाउस साइट पर टनों मलबा पड़ा है। यहां अभी भी कई शव मलबे में दफन हैं। सड़क से दूर होने के कारण यहां मलबा हटाने का काम भी शुरू नहीं हुआ है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य संग्राम सिंह का कहना है कि कंपनी के पावर हाउस साइट में कई शव दफन हैं। उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी का कहना है कि रैणी में जहां पर शवों के दबे होने की आशंका है, वहां मलबे को हटाया जा रहा है। संवाद
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बंशी को अभी भी बेटे महेंद्र के लौटने की उम्मीद
गोपेश्वर। तपोवन सुरंग में फंसे वेपा गांव के महेंद्र लाल का कुछ पता नहीं लग पाया है। पिता बंशीलाल को अभी भी अपने बेटे के घर लौटने की उम्मीद है। 30 वर्षीय महेंद्र एक साल से एनटीपीसी में कर रहा था। बंशी लाल का कहना है कि महेंद्र की चार बेटी और एक दस माह का बेटा है। आपदा के बाद से महेंद्र की मां धर्मा देवी और पत्नी अंजू के आंसू थम नहीं रहे हैं। बंशीलाल स्वयं मेहनत मजदूरी करते हैं और महेंद्र ही परिवार का कमाऊ बेटा था। बंशीलाल ने कहा कि आपदा ने हमें बेसहारा कर दिया है। ब्यूरो
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