ऐतिहासिक रैणी गांव के परिवारों का पुनर्वास सुभांई गांव में राजस्व भूमि पर होगा। भू-वैज्ञानिकों ने रैणी गांव में भूगर्भीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट शासन के साथ ही जिला प्रशासन को सौंप दी है। वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में कहा कि रैणी गांव का निचला हिस्सा मानवीय बसावट के लिए सुरक्षित नहीं है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि तहसील जोशीमठ की टीम रैणी गांव के पुनर्वास की रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कितने परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा।
जोशीमठ से करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित रैणी गांव में लगभग 55 परिवार निवास करते हैं। सात फरवरी को ऋषि गंगा की बाढ़ के बाद रैणी गांव भूस्खलन की चपेट में आ गया था। गांव के निचले हिस्से और नीती घाटी की ओर से भूस्खलन शुरू हो गया। संरक्षित प्रजाति के हजारों पेड़ बाढ़ की भेंट चढ़ गए, जिसके बाद से रैणी गांव के ग्रामीण अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे। 14 जून को भारी बारिश के दौरान गांव के निचले हिस्से में मलारी हाईवे का करीब 40 मीटर हिस्सा टूटकर धौली गंगा में समा गया। उसके बाद से गांव में भूस्खलन का दायरा भी बढ़ गया। जिला प्रशासन ने रैणी गांव के भू-गर्भीय सर्वेक्षण के लिए शासन से भू वैज्ञानिकों की टीम भेजने का आग्रह किया, जिसके बाद जियोटेक विशेषज्ञ बी वेंकटेश्वरलू, भूविज्ञानी जीवीआरजी अचार्यलू और ढलान स्थिरीकरण विशेषज्ञ डा. मनीष सेमवाल ने तीन दिन तक गांव का निरीक्षण किया। टीम ने अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है।
वैज्ञानिकों की निरीक्षण टीम ने रैणी गांव के निचले हिस्से को सुरक्षित नहीं बताया है। लिहाजा रैणी गांव से परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा। सुभांई गांव के समीप भूमि का चयन भी कर लिया गया है। जोशीमठ तहसील व राजस्व टीम क्षेत्र में सर्वेक्षण कर रिपोर्ट सौंपेगी कि कितने परिवारों का पुनर्वास किया जाना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी