कर्णप्रयाग। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में संस्कृत विभाग की ओर से आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा में वैश्विक चेतना विषय पर हुए राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन भी छात्रों ने शोध प्रस्तुत किए। सेमिनार में झारखंड, पंजाब, दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से विभिन्न शोधार्थियों एवं सहायक प्राध्यापक ऑनलाइन और ऑफलाइन जुड़े और अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि गढ़वाल केंद्रीय विवि के प्रो. डीएस राणा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को शोध की ओर उन्मुख करेंगे। प्राचार्य डाॅ. वीएन खाली, डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को जल्द स्थापित करना जरूरी है जिससे मानव जाति का वांछित कल्याण हो सके। डॉ. मृगांक मलासी ने सेमिनार में हुए सभी सत्रों का सार रखा। मुख्य वक्ता डॉ. जितेंद्र अंथवाल, डॉ. वीपी भट्ट, विशिष्ट अतिथि डॉ. एमएस कंडारी ने कहा भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़े इतनी मजबूत हैं कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विदेशियों ने भी गीता से प्रेरणा लेकर कार्य किया। डॉ. अखिलेश कुकरेती, डॉ. मदन लाल शर्मा, डॉ. रमेश चंद्र भट्ट, डॉ. भाल चंद्र नेगी, डॉ. चंदावती, डॉ. कविता पाठक आदि मौजूद रहे। संवाद