इंदौर में घेस गांव के युवक यशपाल बिष्ट की हत्या का इंदौर पुलिस ने पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक यशपाल की पत्नी और उसका प्रेमी इस हत्याकांड में शामिल रहे हैं। मामले में मृतक की पत्नी, उसके प्रेमी और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना से पूरा घेस गांव स्तब्ध है। बता दें कि इंदौर में एक दवा कंपनी में ड्रग कंट्रोलर के पद पर कार्यरत यशपाल की विगत 19 जून को हत्या कर दी गई थी।
घेस के प्रधान नरेंद्र सिंह के अनुसार श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान रुद्रप्रयाग जनपद की अंजलि और यशपाल एक दूसरे के नजदीक आए। यशपाल अंजलि से विवाह करना चाहता था, लेकिन अंजलि के हार्ट की मरीज होने से यशपाल के परिजन इस प्रेम विवाह के खिलाफ थे। इसके बावजूद यशपाल ने अंजलि से वर्ष 2012 में विवाह कर लिया।
यशपाल अंजलि को भी अपने साथ इंदौर ले गया। बताया जाता है कि कुछ समय से अंजलि देहरादून में अपनी बीमारी का इलाज करवा रही थी, इसी दौरान कोटा (राजस्थान) के निवासी युवक करण से उसकी फेस बुक पर दोस्ती हो गई और कुछ दिनों में ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में बदल गई। अंजलि ने युवक को यशपाल से मिलाकर दोनों में भी दोस्ती करा दी।
इस बीच कंपनी में पत्नी की बीमारी का हवाला देकर यशपाल ने खुद का तबादला देहरादून करवा लिया।
उसे एक जुलाई को देहरादून में ज्वाइनिंग देनी थी, लेकिन अंजलि को उसका देहरादून आना मंजूर नहीं था। इंदौर गए परिजनों के हवाले से यशपाल की मां आलमी देवी ने आरोप लगाया कि अंजलि ने 19 जून को अपने प्रेमी करण को इंदौर भेजकर यशपाल की हत्या करवा दी और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए खुद 20 जून को शव लेने इंदौर पहुंच गई। पुलिस ने मामले का खुलासा कर अंजलि, अंजलि के प्रेमी और दो अन्य को गिरफ्तार कर लिया है।
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
घेस गांव के सरपंच कुंदन भंडारी ने कहा कि मृतक यशपाल के पिता महेंद्र सिंह की मौत दो साल पहले हो गई। घर में बूढ़ी मां और दो भाइयों का परिवार है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की है।
......जाते जाते वो अपने जाने का गम दे गए!
देवाल (ब्यूरो)। मौत से कुछ घंटे पहले 19 जून को फादर्स डे पर यशपाल द्वारा फेस बुक पर अपने पिता के लिए डाली गई पोस्ट कभी न भुलाने वाली पोस्ट साबित हुई। इस पोस्ट में यशपाल ने लिखा था कि जाते-जाते वो अपने जाने का गम दे गए, सब बहारें ले गए रोने का मौसम दे गए, ढूंढती है निगाह पर अब वो कहीं नहीं, अपने होने का वो मुझे कैसा भ्रम दे गए, मुुझे मेरे पापा की सूरत याद आती है, वो तो ना रहे अपनी यादों का सितम दे गए, एक अजीब सा सन्नाटा है आजकल मेरे घर में, घर की दरों दिवार को उदासी का पैगाम दे गए, बदल गई है अब तासीर जिदंगी की, तुम क्या गए आंखों में मंजरे मातम दे गए.....।