सात दिवसीय दशोलीगढ़ सांस्कृतिक विकास मेले के अंतिम दिन गढ़वाली कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं से दर्शकों को खूब गुदगुदाया और पहाड़ की समस्याओं को भी बताया। इस दौरान भोटिया जनजाति की महिलाओं और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां भी दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम व पुरस्कार वितरण के साथ सात दिवसीय मेले का समापन हो गया।
मेले के अंतिम दिन ब्लॉक प्रमुख भारती देवी और भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर बिष्ट ने कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इसके बाद मंच पर कलश साहित्यिक संस्था की ओर से आयोजित कवि सम्मलेन में जहां हास्य कवि मुरली दीवान ने मेल्यो हमुन अपणी सूरत शीशा मा देखी नी..., तेजपाल निर्मोही ने सोने की लंका हनुमानन जगाई, पर हमारी सोने की चिडियां कै बन्दूक्यन भजाई..., जगदंबा चमोला ने जु छा यख वू उन्द चलिन, पहाड़ मां यख सूख्या मुंगर्योट रयां छन, राजा तिवारी ने जख छा ब्याली, वखी खडा छन, सवाल वु ब्याल्या तन्यो तनी छन..., बृजेश रावत ने राशन पाणि गैंणा रौण दे पैलि दारु ल्यो..., रोशनी पोखरियाल ने कुलैं पंय्या का झोंका न बणैले बेदि..., लक्ष्मी प्रसाद मलगुड़ी ने जिंदगी अब दिल्ली देहरादून ह्वेगी..., दीपक सती ने धन्य ह्वे मरु भाग जु जलम मिली पहाड़ मां.... और कलश संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल ने नमन तौं क्रांतिकारियों तै जु दास्ता छुडेगिन... कविताओं की प्रस्तुति दी। कवियों ने कविताओं के माध्यम से समाज के बदलते परिवेश का चित्रण किया, वहीं पलायन और वर्षों बाद भी विकास न होने के दर्द को उकेरा। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य विक्रम बर्त्वाल, समीर मिश्रा, पूर्व डीसीबी अध्यक्ष जगदीश वैष्णव, पूर्व विधायक अनिल नौटियाल, आयोजित समिति के सचिव विजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, कुंवर सिंह कंडेरी आदि मौजूद थे।