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अब आंदोलन तेज करेगी पिंडारी संघर्ष समिति

Thu, 10 Nov 2016 10:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
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 प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद पिंडारी संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। तय किया गया कि शुक्रवार से दो दिनों तक क्रमिक अनशन और उसके बाद आमरण अनशन किया जाएगा। इससे पूर्व आंदोलनकारियों ने प्रशासन के रवैये पर गहरा आक्रोश प्रकट करते हुए बृहस्पतिवार को बाजार में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार एवं प्रशासन का पुतला फूंका।
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सुयालकोट घाटी के ग्रामीणों की मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को वार्ता होनी थी। तहसीलदार माणिक लाल ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया था कि जिलाधिकारी से उनकी वार्ता कराई जाएगी। वार्ता के लिए लोनिवि के ईई एसके पांडे, ऊर्जा निगम के एसडीओ गुलशन बुलानी, दूरसंचार के एसडीओ बीएस रावत, पीएमजीएसवाई के ईई बीएस रावत और तहसीलदार माणिक लाल तो पहुंचे, लेकिन डीएम और एसडीएम नहीं आए।

इसके बाद भी दोपहर 12 बजे ग्रामीणों के साथ अधिकारियों ने वार्ता की, लेकिन समस्याओं का निस्तारण कब होगा इसका जवाब अधिकारी नहीं दे पाए। समिति के अध्यक्ष दर्शन दानू से कहा कि प्रशासन से किसी अधिकारी का न पहुंचना समस्याओं के प्रति उदासीनता दर्शाता है। इसके बाद दर्शन दानू ने अपना सिर दीवार पर पटका और बेहोश होकर गिर पड़े।
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इस दौरान भीड़ में से किसी ने मिट्टी का तेल उड़ेल दिया, जो सुरक्षा कर्मियों के साथ-साथ 15-20 लोगों पर जा गिरा। इस दौरान आंदोलनकारियों और सुरक्षा कर्मियों में जमकर विवाद भी हुआ। एक घंटे तक अस्पताल में उपचार के बाद दर्शन दानू को पुलिस ने निजी मुचलके पर छोड़ा। इसके बाद दर्शन दानू धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक आंदोलन करने की अपील की। शाम चार बजे आंदोलनकारियों ने बाजार में प्रदर्शन किया और सरकार तथा प्रशासन का पुतला फूंका।  

इधर, डीएम विनोद कुमार सुमन ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा कि बताया कि वे अवकाश पर हैं। प्रदर्शन करने वालों में दलबीर दानू, तेजपाल सिंह, गिरीश मिश्रा, बलबीर घुनियाल, मंजू परिहार, केडी मिश्रा, नंदन गड़िया, दीपा जोशी, नंदा देवी, नंदी गड़िया, धर्म सिंह, केशर बिष्ट आदि शामिल थे।

ये था मामला
सुयालकोट घाटी के हरमल, चोटिंग, सौंरीगाड़, झलिया, रामपुर, तोरती, उफ्थर, धारकुंवर पाटा, चनियाली सहित आसपास के गांवों में सड़क, बिजली और दूरसंचार सुविधा नहीं है। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने मंगलवार को पिंडारी संघर्ष समिति के नेतृत्व में धरना दिया था और वार्ता के दौरान अफसरों को चार घंटे तक बंधक बनाया था। इसके बाद डीएम ने उचित कार्रवाई के आदेश दिए थे और बृहस्पतिवार को ग्रामीणों के साथ वार्ता की बात कही थी लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचा।
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