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सरकारी मदद न मिली तो खुद जुटे निर्माण में

Tue, 23 Feb 2016 09:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
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ढाई साल पूर्व आपदा से क्षतिग्रस्त हुए मंदिरों का पुनर्निर्माण कराने के लिए जब सरकारी सिस्टम से कोई मदद नहीं मिली तब ग्रामीण एकजुट हुए और जुट गए अपने इष्टदेवता के मंदिर निर्माण में।
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 मौणा गांव में जहां प्रति परिवार का एक व्यक्ति मंदिर के काम में जुटा है, वहीं प्रवासी लोग दान देकर मैटीरियल खरीदने में मदद कर रहे हैं। यही नहीं केवर में ग्रामीणों की मदद से मंदिर का निर्माण पूरा होने वाला है। 


ब्लाक के मौणा गांव के 150 से अधिक परिवारों ने वर्ष 1979 में श्रमदान कर मां गौरजा भवानी का मंदिर बनाया था। तब से यहां लोग हर तीसरे वर्ष नवरात्रि की पूजा करते थे। वर्ष 2013 की आपदा में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
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 मंदिर समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह बताते हैं कि इस दौरान प्रशासन, विधायक और मुख्यमंत्री को भी मंदिर पुनर्निर्माण के लिए पत्र भेजे गए, लेकिन कोई जवाब तक नहीं मिला।

मंदिर में हर तीन वर्ष में होने वाली देवी नवरात्रि की पूजा भी नहीं हो पाई। सिस्टम से थक-हारकर ग्रामीणों ने गांव में बैठक कर खुद ही मंदिर के पुनर्निर्माण करने की ठानी और सोमवार 22 फरवरी से ग्रामीणों ने इसकी शुरुआत की।

ग्राम प्रधान कमला देवी ने बताया कि गांव में 40-45 परिवार हैं। ऐसे में एक परिवार से एक व्यक्ति इस निर्माण कार्य में जुटा। इस पर गांव के प्रवासियों ने भी कदम आगे बढ़ाए और मंदिर निर्माण के लिए अंशदान देना शुरू किया। गांव के दिल्ली में रह रहे मनवीर सिंह ने मंदिर निर्माण में 21 हजार की धनराशि दी तो अन्य कई लोगों ने भी इसमें सहयोग दिया।

मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष गोविंद सिंह नेगी, बिक्रम सिंह, पान सिंह आदि ने कहा कि 24 मार्च से पहले मंदिर का कार्य पूरा करने के बाद मंदिर में भव्य धार्मिक अनुष्ठान किया जाएगा। दूसरी ओर डा. हरपाल नेगी ने बताया कि आपदा में क्षतिग्रस्त केवर के शिव मंदिर का निर्माण भी अंतिम चरण में है। इस मंदिर को ग्रामीणों सहयोग राशि जुटाकर बना रहे हैं।
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