घाट-नंदप्रयाग मोटर मार्ग पर हुई बस दुर्घटना में घायलों के लिए स्थानीय लोग ही देवदूत बने। पुलिस और आपदा रेस्क्यू टीमें घटना के करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। मौके पर मात्र एक 108 एंबुलेंस भेजी गई थी, जबकि घायलों की संख्या अधिक थी।
ऐसे में स्थानीय युवाओं ने घायलों को कंबल में लिटाकर कंधे के सहारे सड़क तक पहुंचाया। घटना के एक घंटे बाद पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा मय फोर्स प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घाट में घायलों को देखने पहुंचे।
घाट बाजार के लोग सुबह सवा नौ बजे सैतोली में बस दुर्घटना की जानकारी मिलते ही घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। प्रधान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी, सुखवीर रौतेला, गौर सिंह, नंदन सिंह, राकेश बिष्ट सहित स्थानीय युवाओं ने खाई में जगह-जगह पड़े घायलों को रेस्क्यू कर सड़क पर पहुंचाया।
यहां मात्र एक 108 एंबुलेंस को खड़ी देख लोगों ने अपने निजी वाहनों में घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घाट में भर्ती कराया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया। स्थानीय निवासी सुखवीर रौतेला ने बताया कि खाई में सवारियां दर्द से चिल्ला रही थीं। युवाओं ने प्रशासन के संसाधनों का इंतजार किए बगैर घायलों को सड़क तक पहुंचाने का कार्य किया।
पूर्व में हुई बस दुर्घटनाओं पर एक नजर
सैतोली बस दुर्घटना ने जिले में पूर्व में हुई बड़ी बस दुर्घटनाओं की याद दिला दी। वर्ष 1998 में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चमोली चाड़े के पास बदरीनाथ धाम जा रहे तीर्थयात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त होकर अलकनंदा में समा गई थी।
तब बस में सवार सभी 36 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। वर्ष 2010 में बदरीनाथ हाईवे पर ही मैठाणा के पास स्थानीय लोगों से भरी बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरी थी। इसमें सवार 26 में से 12 लोग काल के गाल में समा गए थे।
10 मई 2014 को घाट ब्लॉक मुख्यालय के समीप तोणीधार स्थान पर हुई बस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो गई थी। तोणीधार से मात्र तीन सौ मीटर की दूरी पर स्थित सैतोली में यह बस दुर्घटना हुई है। पिछले वर्ष दो मई को पुरसाड़ी के समीप हुए बस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 23 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे।
गड्ढों में टूट गया बस का पट्टा
बस परिचालक रंजन राम ने बताया कि सड़क पर बहुत गड्ढे थे। हिल साइड चट्टान का मलबा भी अटका था। सड़क के गड्ढों से बचकर चालक बस को चला रहा था। इसी दौरान अचानक बस का पट्टा टूटने का आभास हुआ। बस अनियंत्रित हुई और देखते ही देखते खाई में जा गिरी।