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पिंडर नदी पर पुल निर्माण की सुस्त गति पर भड़के

Fri, 15 May 2015 10:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
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पिंडर नदी पर स्वीकृत पुल निर्माण में देरी को लेकर व्यापारियों ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार का चार घंटे तक घेराव किया। व्यापारियों ने कहा कि अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के चलते पुल निर्माण का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।
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 बाद में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता और ठेकेदार की ओर से 30 जून तक पुल के गार्डर आर-पार करने की बात पर व्यापारी माने।

शुक्रवार अपराह्न करीब दो बजे अधीक्षण अभियंता विशन लाल और ठेकेदार पुल का निरीक्षण करने कार्यस्थल पर पहुंचे। इसकी सूचना मिलते ही मुख्य बाजार, उमा देवी चौक के व्यापारी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से पुल निर्माण पूरा होने की जानकारी ली।

ठेकेदार ने दो तीन साल में काम पूरा होने की बात कही जिस पर व्यापारियों का गुस्सा भड़क गया। वह लोक निर्माण विभाग के दफ्तर तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे और कार्यालय में सांकेतिक तालेबंदी भी की। जहां से वह दोबारा कार्यस्थल पर पहुंचे और अधिकारियों सहित ठेकेदार का घेराव किया।
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व्यापारियों ने कहा कि पुल न बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शाम छह बजे अधीक्षण अभियंता विशन लाल और ठेकेदार ने व्यापारियों को लिखित आश्वासन दिया तब वह शांत हुए।

घेराव करने वालों में जिला निर्माण समिति के सदस्य राजा चौहान, सुभाष सती, व्यापार संघ अध्यक्ष कुशल बिष्ट, महामंत्री बृजेश बिष्ट, हरनाम लूथरा, राकेश नैनवाल, देवी मैखुरी, नगर पंचायत अध्यक्ष सुभाष गैरोला, देवेंद्र सिंह रावत, एमएम नवानी आदि शामिल थे।

लिखित समझौते के अनुसार ये होगा काम
17 मई से -कार्यस्थल पर काम शुरू होगा, 19 से टॉवर उपलब्ध होंगे, 24 से एंकर ब्लाक का निर्माण, 10 जून से टॉवर  लगेंगे और 30 जून तक पुल के मुख्य गार्डर जोड़ दिए जाएंगे।

इस्टीमेट दोगुना, काम की गति आधी
बदरीनाथ हाईवे को नैनीताल हाईवे से जोड़ने के लिए पिंडर नदी पर पुल निर्माण के लिए वर्ष 2011 में पुल निर्माण की स्वीकृति मिली। करीब एक साल तक पुराने पुल को नहीं हटाया गया।

जनवरी 2014 में पुल निर्माण का काम शुरू किया गया, तब सितंबर और जनवरी में लोनिवि ने 30 जून तक पुल निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक पुल के केवल आधार ही बन पाए हैं। इस दौरान पुल की लागत चार करोड़ से आठ करोड़ हो गई है।

पुराने डिजायन में खामी बताकर ठेकेेदार और विभाग की मांग पर पुराने इस्टीमेट को दोगुना कर धनराशि स्वीकृत की गई। बाजवूद इसके पुल निर्माण की गति धीमी हो गई। लोगों का कहना है कि दोबारा बजट स्वीकृत होने के बाद दस फीसदी काम भी नहीं हो पाया है।
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