कर्णप्रयाग। श्री राजराजेश्वरी चंडिका देवी सिमली के बनेथा धार्मिक महोत्सव के दूसरे दिन यज्ञ पुरुष के चालीस विवाह की पौराणिक परंपरा निभाई गई। नौ दिनों तक यज्ञ पुरुष के प्रतीकात्मक विवाह होने हैं। बृहस्पतिवार को ऐरवालों और देवी-देवताओं के पश्वाओं ने अपने निशाणों के साथ देवनृत्य किया।
सिमली बनातोली में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार को सुबह आचार्य गणेश चंद्र खंडूड़ी ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का विधिवत पाठ किया और देवी के नौ रूपों के बारे में बताया। पुजारी कांति प्रसाद गैरोला और ब्रह्मगुरु विशंबर दत्त सती ने माता चंडिका और ब्रह्म निशाण की पूजा की। जागरों से ब्रह्म निशान और देवी देवताओं को जागृत किया। देवी के ऐरवालों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और ब्रह्म निशान के साथ देवनृत्य किया। पौराणिक परंपराओं के अनुसार यज्ञ पुरुष के प्रतीकात्मक विवाह के तहत आयोजकों ने डोली में दुल्हन को बैठाकर विधि विधान से विदा किया। आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ चंडी पाठ, देवी कवच आदि से यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित की। महोत्सव में सिमली, सैनू, कोली, पुड़ियाणी, सुंदरगांव, गैरोली, डिम्मर, कर्णप्रयाग आदि स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे। संवाद
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प्रेरणा ग्रुप की बालिकाओं ने दी प्रस्तुति
कर्णप्रयाग। श्री राजराजेश्वरी चंडिका देवी के धार्मिक महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। कार्यक्रमों का शुभारंभ कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने किया। उन्होंने कहा कि मां चंडिका की देवरा यात्रा एक तपस्या है जिसके प्रतिफल से संपूर्ण क्षेत्र में खुशहाली और सुख-समृद्धि बनी रहेगी। इस दौरान प्रेरणा ग्रुप की बालिकाओं ने स्वागत गीत, सिमरन ग्रुप ने देवी के जागर गीत, महिला मंगल दल सिमली और पाडली की महिलाओं ने प्रस्तुतियां दीं। समिति के मीडिया प्रभारी देवेंद्र सिंह नेगी के संचालन में हुए कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष हेमंत टकोला, गायत्री नेगी, बीरेंद्र सिंह लडोला, विक्रम कठैत, खुशाल सिंह सगोई, धन सिंह नेगी आदि मौजूद थे। संवाद