जोशीमठ के पैनखंडा समुदाय को आखिरकार सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने का आदेश जारी कर दिया है। मांग पूरी होने से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग पांच सालों से ओबीसी की लड़ाई लड़ रहे थे।
समुदाय को ओबीसी में शामिल करने की मांग सबसे पहले 2011 में उठी थी, तब पैनखंडा संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश सती ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर जोशीमठ के पैनखंडा क्षेत्र को ओबीसी में शामिल करने की मांग उठाई।
पीएमओ को भेजी पत्रावलियों में कहा गया कि जोशीमठ क्षेत्र के ग्रामीण आज भी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से अत्यधिक पिछड़े हुए हैं और बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सड़क जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। तब प्रधानमंत्री कार्यालय से भारत सरकार के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को मांग पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
27 मार्च 2012 को आयोग ने मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्रावलियां राज्य सरकार को भेजी, लेकिन कुछ समय तक समाज कल्याण विभाग और सचिवालय में ओबीसी की फाइलें इधर-उधर होती रही। आखिरकार समिति ने स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आंदोलन शुरू करने की योजना बनाई। इसके बाद 13 सितंबर से जोशीमठ तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया। इस दौरान दो बार जोशीमठ बंद और चक्का जाम भी किया गया।
जोशीमठ के पैनखंडा समुदाय की 73 जातियों के 48 हजार 202 लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का लाभ मिलेगा। ओबीसी में क्षेत्र की 43 ग्राम पंचायतें शामिल होगी। ओबीसी मानक के अनुसार पैनखंडा समुदाय के लोगों को (एससी-एसटी के गांवों को छोड़कर) केंद्रीय योजनाओं में 27 और राज्य स्तरीय योजनाओं में 14 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा।
यह पैनखंडा समुदाय के ग्रामीणों की जीत है। आंदोलन के बूते यह न्यायोचित मांग पूरी हुई है। इससे क्षेत्र में पलायन पर रोक लगेगी। युवा-युवतियों को सरकारी सेवा में जाने के लिए लाभ मिलेगा।
-रमेश सती, अध्यक्ष, पैनखंडा संघर्ष समिति, जोशीमठ।
जोशीमठ क्षेत्र की 43 ग्राम सभाओं को ओबीसी का लाभ मिलेगा। सरकार के इस फैसले से सीमांत जोशीमठ से हो रहे पलायन पर प्रभावी रोक लग पाएगी। साथ ही इस क्षेत्र के युवा-युवतियों को रोजगार के लिए दर-बदर नहीं भटकना होगा। जोशीमठ क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी।
-राजेंद्र भंडारी, विधायक, बदरीनाथ विधान सभा क्षेत्र।