चमोली जिले की मंडल घाटी में स्थित सती शिरोमणि पुत्र दायिनी माता अनसूया माता मंदिर में दो दिवसीय मेला शुरू हो गया है। सोमवार को 136 बरोही (निसंतान दंपति) देव डोलियों के साथ अनसूया मंदिर पहुंचे। देर सांय तक भी बाहरी राज्यों के निसंतान दंपतियों के धाम पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इस मौके पर सैकड़ों भक्तों ने माता अनसूया के दर्शन कर मनौतियां मांगी।
कृषि मंत्री राजेंद्र भंडारी ने अनसूया मेले का शुभारंभ किया। मंडल में अनसूया मंदिर गेट पर खल्ला, बणद्वारा, देवलधार, कठूड़ और सगर गांवों से पहुंची देव डोलियों के मिलन को करीब से देखने के लिए यहां सैकड़ों देवी भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। निसंतान दंपतियों ने मेरी झोली भरी देई हे माता से मन्नत मांगी।
मंडल क्षेत्र की महिला मंगल दल की महिलाओं ने माता अनसूया के जयकारे और भजन-कीर्तन की प्रस्तुतियां दी। अपराह्न तीन बजे मंडल घाटी की पांचों देव डोलियों ने अनसूया माता मंदिर के लिए प्रस्थान किया और देर सांय साढे़ पांच बजे डोलियां मंदिर में पहुंची। कृषि मंत्री राजेंद्र भंडारी ने कहा कि पौराणिक धार्मिक मेलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने इस दौरान मंडल गांव के पंचायती चौक में पूजा-अर्चना में भी भाग लिया। अनसूया मंदिर में श्री अत्री अनसूया दत्तात्रेय शक्ति फाउंडेशन की ओर से देवी भक्तों और निसंतान दंपतियों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जो दो दिनों तक चलेगा।
अनसूया मंदिर के पुजारी डा. प्रदीप सेमवाल ने बताया कि गुजरात, मुंबई के साथ ही मैदानी क्षेत्रों से कई देवी भक्त माता अनसूया के दर्शनों को पहुंचे हुए हैं। इस मौके पर अनसूया मंदिर समिति के अध्यक्ष बीएस झिंक्वाण, पूर्व अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी और पूर्व प्रमुख भगत सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।
श्रीनगर गढ़वाल में स्थित प्रसिद्ध कमलेश्वर मंदिर में जहां दंपति पुत्र कामना के लिए रातभर खड़े हाथों में दिए लेकर जागरण करते हैं, वहीं माता अनुसूया मंदिर में बरोहियों को मंदिर प्रांगण में बने एक कक्ष में बैठाया जाता है। मान्यता है कि उन्हें यहां सपने में माता अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं। जिस बरोही को माता दर्शन दे देती है, वह चुपके से उठकर मुख्य मंदिर में पूजा के लिए पहुंच जाती है। मान्यता है कि जिस भी बरोही के स्वप्न में कन्या आएगी, तो उसे शुभ माना जाता है।