चमोली कस्बे में एक दशक से क्षतिग्रस्त पड़ी सीवरेज लाइन के शीघ्र सुधारीकरण के लिए उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल ने नोटिस में कहा कि सीवरेज क्षतिग्रस्त होने से अलकनंदा नदी प्रदूषित हो रही है।
सीवरेज का मलबा पैदल मार्ग और सड़क पर फैल रहा है, लिहाजा शीघ्र सीवरेज मरम्मत कार्य किया जाए। ऐसा न करने पर दोनों विभागों के विरुद्ध बोर्ड पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
चमोली के नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत ने बीते वर्ष अगस्त और नवंबर माह में पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को पत्र भेजकर शीघ्र जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों को सीवरेज मरम्मत कार्य करने के निर्देश देने की मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तब बीते वर्ष नवंबर माह में ही उन्होंने दोनों विभागाें की शिकायत उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की।
अध्यक्ष संदीप रावत ने कहा कि चमोली में वर्ष 1985-86 में सीवरेज लाइन का निर्माण कार्य हुआ था, लेकिन अब लाइन पुरानी हो जाने से वर्ष 2005 के बाद से जगह-जगह क्षतिग्रस्त पड़ी है। सीवरेज की गंदगी को खुलेआम अलकनंदा में डाला जा रहा है।
उन्होंने पेयजल निगम के अपर मुख्य सचिव को भी पत्र भेजकर जल निगम और जल संस्थान में से एक विभाग को सीवरेज ट्रीटमेंट का दायित्व सौंपने की मांग की है।
योजना हैंडओवर नहीं हुई
वर्ष 1985-86 में जब चमोली सीवरेज लाइन निर्मित हुई थी तो निर्माणाधीन के दौरान ही अधिकांश कनेक्शन बांट दिए गए थे। तब से हमें यह योजना हैंडओवर नहीं हुई है।
चमोली में नई सीवर योजना बन रही है, यदि जल निगम पुराने सेफ्टी टैंक को ठीक करके देता है तो पुरानी लाइन को चालू ही कर दिया जाएगा। - जेपी जोशी, ईई, जल संस्थान, चमोली।
संस्थान ध्यान नहीं दे रहा
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक हमें इसके लिए मंजूरी नहीं मिली है। सीवरेज लाइन के रख-रखाव का कार्य जल संस्थान का होता है, लेकिन संस्थान इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। - पीसी गौतम, ईई, जल निगम, चमोली।