घाट ब्लॉक में पीएमजीएसवाई के तहत बन रही मोलागाड-मटई मोटर मार्ग पर कई जगहों पर सफर जानलेवा बना है। कई खतरनाक स्थानों पर ग्रामीण वाहन के बजाय पैदल चलने में अपनी भलाई समझते हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद सड़क की दुर्दशा नहीं सुधारी जा रही है।
मोलागाड-मटई सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2006 में शुरू हुआ। केंद्र सरकार से इसके लिए एक करोड़ 97 लाख 64 हजार स्वीकृत हुए। वर्ष 2011 तक बेरासकुंड तक 10.84 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन आज तक सड़क निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
सड़क से क्षेत्र के बैरासकुंड, सेमा, धुर्मा, मोलागाड, कांडई, ईतमोली, हितमोली, खल्तरा, भेमल्ता, ग्वाड़, मटई और बैरों गांव के ग्रामीण आवाजाही करते हैं। सेमा प्रधान महिपाल सिंह का कहना है कि उक्त सड़क मटई से बैरासकुंड (तीन किलोमीटर) तक खतरनाक बनी है।
वर्ष 2013 की आपदा में भी सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन आज भी कई जगहों पर हिल साइड का मलबा सड़क किनारे पसरा हुआ है। पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता आरपी सिंह का कहना है कि मोलागाड-मटई सड़क पर पुश्ता निर्माण और सुधारीकरण कार्य चल रहा है। जहां सड़क खतरनाक हैं वहां प्राथमिकता के आधार पर सड़क सुधार कार्य किया जाएगा।