न संसाधन और न ही ट्यूशन की कोई व्यवस्था। इसके बाद भी सिलोड़ी गांव के अक्षत नेगी ने प्रदेश की सूची में 23वां स्थान हासिल किया है। अक्षत ने राजकीय हाईस्कूल सिलोड़ी से दसवीं की परीक्षा दी और गांव में रहकर ही पढ़ाई की। उन्होंने 93.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य जगदीश शर्मा बताते हैं कि अक्षत शुरू से ही कुशाग्र बुद्धि का रहा है। इसे देखते हुए अक्षत को कक्षा नौ से राष्ट्रीय साधन सह छात्रवृत्ति (प्रतिवर्ष 6000 रुपये) भी दी जाती है।
अक्षत के पिता दलीप सिंह नेगी गांव में खेती करते हैं और अक्षत की मां दीपा देवी खेती में हाथ बंटाती हैं। शिक्षक उमेश पुरोहित, विमल ममगाईं, डा. कृपाल सिंह और अन्य शिक्षकों ने अक्षत को पूरा सहयोग दिया।
अक्षत ने बताया कि वह घर पर 6 से 8 घंटे नियमित अध्ययन करता था। कोई भी दिक्कत होने पर शिक्षकों का सहयोग लेता था। गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद अक्षत ने सड़क और नगरीय क्षेत्र से करीब 15 किमी दूर विद्यालय में ही रहकर यह मुकाम हासिल किया है। अक्षत की सफलता पर दिलीप सिंह का परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है।