कर्णप्रयाग के राड़खी गांव में नेपाली मूल के लोगों द्वारा खेतों उगाई जा रही है पहाड़ी दालें।
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एक तरफ जहां पहाड़ी क्षेत्रों में लोग जंगली जानवरों के आंतक और मिट्टी को अनुपजाऊ होना बताकर खेती छोड़ रहे हैं, वहीं नेपाली मूल की महिलाएं व पुरूष अपने पसीने से बंजर खेतों को सींचकर कर्णप्रयाग, आदिबदरी और गैरसैंण में सब्जियां उगाकर मालामाल बन रहे हैं। इन दिनों पहाड़ के बाजारों में नेपाली मूल के लोगों द्वारा उगाई गई सब्जी के खरीददारों की भीड़ लगी है।
कर्णप्रयाग के सांकरीसेरा, सुभाषनगर, राड़खी, टटासू बगड़, दियारकोट, लंगासू, ईडाबधाणी, आदिबदरी, खेती, कस्बों और गांवों में बंजर खेतों के बीच नेपाली लोगों ने सब्जी उत्पादन कर स्थानीय लोगों को आइना दिखाया है। सब्जी की खेती कर रहे राम बहादूर, प्रेम बहादूर आदि ने बताया कि इन दिनों उनके खेतों में राई, मूली, लोंकी, हरी मिर्च, पालक, छेमी, तुरई आदि सब्जियों की फसल लहलहा रही है। कहा, उन्होंने ग्रामीणों से किराये पर खेत ले रखे हैं और उनमें कठिन परिश्रम करने के बाद वे जैविक और रासायनिक खादों का मिश्रण कर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। वाहनों के जरिये और स्वयं पीठ पर लादकर उगाई गई सब्जियों को कर्णप्रयाग, सिमली, गौचर, आदिबदरी व गैरसैंण सहित अन्य छोटे बाजारों में स्थानीय दुकानदारों को बेचते हैं। सब्जी उत्पादन की बदौलत रोजाना हजारों रूपये कमाकर वे अपने परिवार का लालन-पालन कर रहे हैं और अपने बच्चों को स्कूलों में शिक्षा दे रहे हैं।
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