रैंस गांव में नैणी देवी के पहले ब्रह्मबंधन का आयोजन परंपरानुसार मनाया गया। सोमवार मध्यरात्रि को यह धार्मिक अनुष्ठान विधिविधान से संपन्न हुआ। 40 वर्षों बाद नैणी देवी की दिवारा यात्रा शुरू होगी। इसमें शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीण भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। पुजारियों और आयोजकों के अनुसार क्षेत्र भ्रमण से पूर्व देवी की मंदिर में पूजा होगी।
कड़ाकोट पट्टी की ईष्ट मानी जाने वाली नैणी देवी की दिवारा यात्रा की तैयारियां छह सितंबर से शुरू हो गई थीं। देवी यात्रा के साथ जाने वाले एरवाल और चिनवालों (देवताओं के पश्वा) के प्रशिक्षण के बाद दस अक्तूबर सोमवार को गांव में पहला ब्रह्मबंधन (देवताओं के निशानों की पूजा अर्चना) का कार्यक्रम हुआ।
नैणी के गुरु पुजारी विशंभर दत्त सती ने बताया कि ब्रह्मबंधन के बाद कुछ दिनों में देव निशानों की पूजा नैणी के मंदिर में की जाएगी, जिसके बाद पंचांग और मुहूर्त निकालकर देवी 180 दिनों की यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगी।
पुजारी राजेंद्र सिंह रावल ने बताया कि यात्रा में शामिल होने के लिए गांव के प्रवासी और धियाणियां बड़ी संख्या में गांव पहुंची हैं। आयोजक समिति के अध्यक्ष ब्रहमबंधन में शिरकत करने के लिए श्रद्धालुओं ने सोमवार रात्रिभर जागरण किया। इस दौरान क्षेत्र के कई प्रधानों ने गांव में भंडारा कर धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया।