उर्गम घाटी की लोकजात यात्रा सोमवार को भूमि क्षेत्रपाल के सानिध्य में शुरू हो गई है। इसी के साथ ध्याण नंदा स्वनूल को बुलाने के लिए मेनवाखाल और भानाई बुग्याल के लिए रवाना हो गई हैं।
उर्गम की इस लोकजात में 12 गांवों की छंतोली शामिल होंगी। सोमवार को रात्रि विश्राम के लिए यात्रा वंशीनारायण पहुंचेगी। अगले दिन मैनवाखाल में भगवती नंदा का आह्वान किया जाएगा। उसके बाद 26 अगस्त को भगवती नंदा स्वनूल उर्गम घाटी पहुंचेगी। मेनवाखाल में ही नंदा स्वनूल का जागरों के माध्यम से मिलन होगा। देवी नंदा नंदीकुंड व स्वनूल सोना शिखर से बुलाई जाएंगी, जबकि भूमि क्षेत्रपाल भर्की के सानिध्य में स्वनूल देवी की जात रात्रि को फ्यूंलानारायण मंदिर पहुंचेगी। इस मौक पर अध्यक्ष राजेंद्र रावत, रघुबीर नेगी, कुंवर चौहान, भवान सिंह रावत, महावीर पंवार, हरि कंडवाल मौजूद थे। संवाद
भक्तों की बढ़ती संख्या देख वेदनी में पुलिस ने लगाया बैरियर
देवाल/घाट। सोमवार को नंदा लोकजात यात्रा वांण गांव से विदा होकर निर्जन पड़ाव गैरोली पातल पहुंची। मंगलवार सुबह यात्रा वेदनी पहुंचेगी और यहां पूजा अर्चना के बाद वांक गांव पहुंचेगी। वांण गांव में बाहर से सैकड़ों लोगों के पहुंचने से प्रशासन व वन विभाग हरकत में आया और ज्यादा लोग वेदनी न पहुंच सकें इसके लिए रेगुलर/राजस्व पुलिस व वन विभाग ने रणकधार में बैरियर लगा दिया। रेंजर टीएस बिष्ट व चौकी प्रभारी जगमोहन पडियार ने कहा कि यात्रा में शामिल पुजारियों के अलावा वाण से नामित 10 लोगों ही यात्रा में जाने दिया गया है। इस मौके पर लाटू देवता के पुजारी खीम सिंह, मंशाराम गौड, जिपंस कृष्णा बिष्ट, हीरा पहाड़ी, हीरा बुग्याली, कृष्णा सिंह, पान सिंह, गबर सिंह, रमेश कुनियाल, उमेश कुनियाल थे। वहीं कैलाश के लिए विदा हो रही मां नंदा का घाट में विभिन्न पड़ावों पर भक्तों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। सुंग गांव में मां नंदा की विशेष पूजा की गई। संवाद