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चेपड़ों के थोकदारों की नंदा राजराजेश्वरी

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थराली के सूना गांव मां नंदा देवी की पूजा अर्चना करते भक्त। - फोटो : KARNPRYAG
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मायके कुरूड़ से ससुराल कैलाश जाने के क्रम में मां नंदा की लोकजात यात्रा शुक्रवार को बुटोला थोकदारों के गांव चेपड़ों पहुंची। चन्द्रवंशीय राजाओं के बंशज बुटोला थोकदारों के चौक में देवी का भव्य स्वागत किया गया।
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मां नंदा बुटोला थोकदारों की कुल ईष्ट देवी है जो नंदा राजराजेश्वरी के रूप में पूजी जाती है। जैसे ही देवी की डोली ने चौक में प्रवेश किया मां भगवती के पश्वा ने सबसे पहले अवतरित होकर नृत्य किया। इसके साथ ही लाटू, भूम्याल, भैरव और काली के डंगरिये ने भी मां भगवती के साथ-साथ नृत्य करते हुये चौक की परिक्रमा की। तांबासारा ढोल-दमांउ, भुकंरों, और अन्य पारंपरिक वाद्य यन्त्रो के बीच देवी के जागरों पर अवतरित होते हुए क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना करते हुये भक्तों को आर्शीवाद दिया। चेपड़ों सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के भक्त यहां पर नंदा राजराजेश्वरी के दर्शनों के लिए उमड़े। साथ में मां के चढ़ावे के लिए चुनरी, श्रंगार साम्रगी, पूजा सामग्री के साथ ही स्थानीय अनाज व फलों जिसमें मक्का, ककड़ी, अखरोट आदि लाये थे। इससे पहले मां नन्दा की डोली सूना गांव में प्रात: काल की पूजा के बाद सैकड़ों लोगों की पूजा अर्चना के बाद पंचायती पूजा लगी जिसमें पंचायत के सभी परिवार एक साथ देवी को पूजा लगाते हैं। इसके बाद देवी के आह्वान के लिए गीतोरों ने देवी के ननोले लगाये । क्षेत्रपाल देवता के साथ मां काली, लाटू और भूम्याल आदि देवता अवतरित हुए और चावल के रूप में लोगों को प्रसाद देने के बाद सभी देवता मां की डोली के पीछे पीछे सूना गांव की सीमा तक गये। इस अवसर पर माधवानन्द देवराड़ी, कैलाश जोशी, धनी प्रसाद देवराड़ी, विमला देवी,यशोदा देवी, कैलाश देवराड़ी, उमेश देवराड़ी, अनिल देवराड़ी, राकेश देवराड़ी, नरेश देवराड़ी हरि सिंह कठैत और नवीन भटट ने विशेष सहयोग किया।
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