घाट। दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां शुक्रवार को सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना हो गईं। दशोली की मां नंदा की डोली रात्रि प्रवास के लिए अपने पहले पड़ाव फरखेत और बधाण की डोली चरबंग गांव पहुंची। इस दौरान देवी भक्तों ने आराध्य देवी मां नंदा को नम आंखों से विदाई दी। मां नंदा की डोलियां एक दिन के लिए मंदिर परिसर में ही भक्तों के दर्शनार्थ रखीं जाती हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण मां नंदा के गर्भगृह से निकलने के बाद ही कैलाश के लिए रवाना कर दिया गया। डोलियों के साथ 10 भक्त की रवाना हुए।
शुक्रवार को तड़के से ही मां नंदा के मंदिर में विशेष पूजा शुरू हुई। मुख्य पुजारी मंसाराम शास्त्री, बचीराम, राजेंद्र, संजय गौड़, जया दत्त, राजेश प्रसाद और जगदीश प्रसाद ने मां नंदा की पूजा की। सुबह ग्यारह बजे पूजा-अर्चना के बाद दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियों को मंदिर परिसर में लाया गया। इस दौरान थराली विधायक मुन्नी देवी शाह और प्रमुख घाट भारती देवी, जिला पंचायत सदस्य नंदिता रावत की ओर से मां नंदा की पूजा की। अपराह्न 4:30 बजे मंदिर के पुजारियों एवं पदाधिकारियों व अवतारी पुरुषों ने देव डोलियों को कैलाश के लिए विदा किया। यात्रा 14 दिनों तक विभिन्न पड़ावों से होते हुए बालपाटा और वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। जहां नंदा सप्तमी की पूजा के बाद दशोली की नंदा की डोली अपने सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचेगी और बधाण की नंदा छह माह प्रवास के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा गांव पहुंचेगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा पड़ावों पर सामूहिक पूजा नहीं करवाई जाएगी। इस मौके पर भागवत सिंह बिष्ट, राजेंद्र प्रसाद, लक्ष्मण सिंह, बच्चीराम, जयदत्त, सुखवीर रौतेला, दीपक, खिलाफ सिंह आदि मौजूद थे।