बुनियादी सुविधाओं के लिए मंगलवार को ब्लाक मुख्यालय पर धरने पर बैठे सुयालकोट घाटी के ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने वार्ता विफल होने पर शाम करीब चार बजे तहसीलदार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों सहित खुद को ब्लाक सभागार में बंधक बना लिया। रात लगभग सवा आठ बजे लिखित समझौता होने पर ही आंदोलनकारी सभी अफसरों को छोड़ने को तैयार हुए।
सुयालकोट घाटी के हरमल, चोटिंग, सौंरीगाड़, झलिया, रामपुर, तोरती, मानमती, उफ्थर, कुंवरपाटा, चनियाली सहित आसपास के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। न सड़क है न बिजली। फोर-जी युग में संचार सुविधा भी सपना बनी हुई है। लगातार आंदोलन के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने पिंडारी संघर्ष समिति के नेतृत्व में मंगलवार सुबह दस बजे से ब्लाक मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
धरने की सूचना पर दोपहर एक बजे तहसीलदार माणिक लाल, लोनिवि थराली के ईई एसके पांडे, जेई संतोष पंत और पीएमजीएसवाई के जेई डीएस भंडारी आंदोलनकारियों से वार्ता के लिए पहुंचे, लेकिन अन्य विभागों के अधिकारियों के नहीं पहुंचने से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा।
ब्लाक सभागार में अधिकारी, आंदोलनकारियों को मनाने में जुटे थे कि करीब चार बजे एक आंदोलनकारी ने सभागार के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया। इससे सभी अधिकारी और वार्ता में शामिल तीस आंदोलनकारी ब्लाक सभागार में ही कैद हो गए।