दशोली ब्लॉक के खैनुरी गांव में 13 वर्षों बाद जांती मेले का आयोजन हुआ। मेले में भूमियाल और जाख देवता के दर्शनों को सैकड़ों ग्रामीण उमड़े। सोमवार को भूमियाल देवता के मंदिर में सुबह चार बजे से ही पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी।
मान्यता है कि प्राचीन काल में मां नंदा की राजजात में खैनुरी क्षेत्र के भूमियाल और जाख देवता भी शामिल हुए। क्षेत्र में दोनों देवों ने अपनी शक्ति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। तब से क्षेत्र में आज भी भूमियाल और जाख देवता तीन दिन तक लोहे की गर्म की हुई जांती (लोहे का गोल घेरा) को अपने शरीर के बीचोंबीच से होकर जमीन पर फेंकते हैं।
यह आयोजन क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए किया जाता है। मेले में हरमनी, सरतोली, क्षेत्रपाल, रांगतोली, लासी, मजोठी, सेमडुंग्रा पलेठी और ठेली-मेड़ गांव के आराध्य देवों ने भी खैनुरी गांव पहुंच कर ग्रामीणों को दर्शन दिए। इस मौके पर मेला कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान महिपाल सिंह, हयात सिंह, अनिल सिंह, श्याम सिंह और नरेंद्र आदि थे।