पहाड़ों से रोजगार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों में गए युवाओं का लौटना लगातार जारी है। भविष्य की चिंताएं प्रवासियों के चेहरे पर साफ दिख रही हैं। प्रवासियों का कहना है कि वे मैदानों में फैक्ट्रियों व कंपनियों में काम करते हैं, थे लेकिन लॉकडाउन के वहां दौरान काम बंद हो गया। मेहनत से जो पैसा कमाया था वह भी खर्च हो गया। अब घर ही एकमात्र सहारा रह गया है।
चमोली जिले के प्रवासियों को लाने वाली बस गौचर के मेला मैदान में आ रही है और यहां आने वाले हर व्यक्ति की गौचर मेला मैदान में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में थर्मल स्क्रीनिंग, मेडिकल जांच कर पूरा डाटा तैयार किया जा रहा है। उत्तराखंड के गांवों से करीब 2 लाख युवा पलायन कर देहरादून, दिल्ली, गुजरात, मुंबई, राजस्थान सहित अन्य शहरों में नौकरी के लिए गए थे। अब कोरोना वायरस के कारण मैदानी क्षेत्रों में फैक्ट्री व कारखाने बंद होने से युवा अपने घरों को लौट रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के साधन मुहैया कराने की है। संवाद