पुरस्कार वितरण के साथ हुआ नंदादेवी हरियाली मेले का समापनत
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। नौटी बाजार में आयोजित तीन दिवसीय हरियाली पूड़ा मेला का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। अंतिम दिन क्षेत्रीय महिला मंगल दलों और स्कूली बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं।
मेले के अंतिम दिन कार्यक्रमों का शुभारंभ गढ़वाल विश्वविद्यालय के कला संस्कृति एवं निष्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. डीआर पुरोहित ने किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में देवी को अपनी बहन व ईष्टदेवी नंदा को चैत्र माह का उपहार देने की परंपरा का एकमात्र प्रतिनिधित्व करने वाला यह मेला प्रदेश की विरासत एवं पहचान है। राज्य सरकार को राज्य स्तर पर इसे भव्य बनाने का प्रयास करना चाहिये। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष 2027 में हिमालयी सचल महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात को हिमालय स्तर पर भव्य व दिव्य बनाने की चुनौती है। इस अवसर पर देवल गढ़सारी, चौरासैंण, कनोठ मल्ला, गिरतोली, डुंग्री आदि गांवों की महिला मंगल दलों एवं अर्वाचीन शिशु भारती, प्रावि चौरासैंण, नौटी, नैणी, छांतोली, तोली धानई सहित अन्य ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता स्व. पंडित देवराम नौटियाल की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर मोहनलाल उनियाल, टीका प्रसाद मैखुरी, हरिकृष्ण भट्ट, राजेन्द्र सिंह नेगी, गोविन्द सिंह, विक्रम सिंह कुंवर, संदीप कुमार, विक्रम सिंह रावत, दीप लाल आदि ने विचार व्यक्त किए। पुरस्कार वितरण के बाद मेलाध्यक्ष भुवन नौटियाल ने लोगों का आभार जताया।
मां नंदा के बाद ध्याणियों को अर्पित की भिंटोली
कर्णप्रयाग। चैत्र माह में ध्याणियों को आल कलेऊ (भिंटोली) देने की परंपरा है। यही परंपरा ब्लाॅक के नौटी में गांव में मां नंदा को भी देने की भी है। इस परंपरा का यहां सदियों ने निर्वहन किया जा रहा है। मां नंदा को भिंटोली अर्पित करने के बाद लोग अपनी ध्याणियों को भिंटोली देते हैं। इस परंपरा का यहां सोमवार को निर्वहन किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। यहां मां नंदा को ध्याण माना जाता है और ध्याण को चैत्र माह में भिंटोली देने की परंपरा है। प्रधान राखी चौहान कहती हैं कि इस कार्यक्रम में बुजुर्ग हों या युवा सभी महिलाएं प्रतिभाग करती हैं। संवाद