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छह माह तक अपने ननिहाल में प्रवास करेगी मां नंदा

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गोपेश्वर। 14 अगस्त से शुरू होने वाली नंदा लोकजात यात्रा को लेकर ग्रामीणों में उत्साह बना है। यात्रा के संपन्न होने पर मां नंदा छह माह तक अपने ननिहाल देवराड़ा में प्रवास करेंगी। इस बार कोरोना की डर से ग्रामीणों ने यात्रा को सादगी के साथ कैलाश रवाना करने का निर्णय लिया है। यात्रा के सफल संचालन के लिए मां नंदा के सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर समिति ने जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा है।
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समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़, धनीराम गौड़, योगेश्वर गौड़ सुखवीर रौतेला और राजेश गौड़ ने बताया कि मां नंदा की उत्सव डोली कुरुड़ मंदिर के गर्भगृह से 14 अगस्त को बाहर निकलेगी और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी। इसके बाद डोली कैलाश के लिए रवाना होगी। पहले यात्रा पड़ाव चरबंग के बाद धरगांव, उस्तोली, सरपाणी, लांखी, भेंटी, स्यांरी, बंगाली होते हुए डोली थराली ब्लॉक के डुंग्री गांव पहुंचेगी। 24 को वांण गांव से रणकाधार, कैल गंगा होते हुए डोली निर्जन पड़ाव गैरोली पातल पहुंचेगी। 25 अगस्त को यात्रा वेदनी बुग्याल पहुंचेगी, यहां नंदा सप्तमी पर्व पर मां नंदा की विशेष पूजा होंगी। इसके बाद मां नंदा की डोली बांक गांव में प्रवास करेगी। विभिन्न पड़ावों से होते हुए एक सितंबर को मां नंदा अपने ननिहाल सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेंगी और छह माह तक यहीं प्रवास करेंगी।
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