राजी-खुशी राखी, जा नंदा तैं ऊंचा कैलासु जैसे गीतों के साथ शुक्रवार को मां नंदा को विदा किया गया। ढोल-दमाऊं की थाप और भाणा-भंकोरों के साथ मां नंदा की दोनों डोलियों ने कैलास के लिए प्रस्थान किया।
सिद्धपीठ कुरुड़ में दो दिनों तक मंदिर परिसर में भक्तों को दर्शन देने के बाद दशोली की मां नंदा अपने पहले रात्रि प्रवास के लिए फरखेत गांव पहुंची, जबकि बधाण की नंदा भूमियाल के गांव चरबंग पहुंची। महिलाओं और ध्याणियों ने मां नंदा को श्रृंगार सामान में लपेटकर डोली पर बांधा।
मंदिर समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने बताया कि आठ सितंबर को दशेाली की मां नंदा बालपाटा और बधाण की नंदा की बेदनी बुग्याल में अष्ठमी के दिन पूजा-अर्चना संपन्न होगी। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी शाह, भाजपा जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल, प्रकाश गौड़, पंकज गौड़, महिपाल सिंह रावत, जोत सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।
क्षतिग्रस्त रास्तों से गुजरेगी मां नंदा की डोली
घाट (चमोली)। कुरुड़ क्षेत्र में आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों से ही मां नंदा कैलास के लिए विदा हुई। जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन का कहना है कि संबंधित खंड विकास अधिकारी को मनरेगा के तहत पैदल रास्तों को सुधारने के निर्देश दिए गए थे। अगर कहीं रास्ते क्षतिग्रस्त हैं तो उन्हें शीघ्र बनवा लिया जाएगा।
नंदा लोकजात मेला संपन्न
घाट। कुरुड़ में चल रहे तीन दिवसीय नंदा लोकजात मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रंग जमाने वाले प्रतिभागियों को अंतिम दिन पुरस्कृत किया गया, जिसमें लोक नृत्य में महिला मंगल दल कांडा ने प्रथम, कुरुड़ द्वितीय और कुंडबगड़ तृतीय स्थान पर रहा। वहीं, युवक मंगल दल कांडा पहले, लुंतरा दूसरे और नारंगी तीसरे नंबर रहे।
विद्यालयों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता के प्राथमिक वर्ग में सरस्वती शिशु मंदिर घाट प्रथम, हिमालय पब्लिक स्कूल कुरुड़ द्वितीय और एचपीएस घाट तृतीय स्थान पर रहे। लोक गीत में एचपीएस कुरुड़ को पहला, सरस्वती शिशु मंदिर घाट को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। जबकि जूनियर वर्ग में एसजीआरआर घाट ने पहला, चिल्ड्रन एकेडमी घाट ने दूसरा व राउमावि कुंडबगड़ ने तीसरा स्थान हासिल किया।