प्राथमिक विद्यालय आदिबदरी में स्कूल भवन की छत टपकने से बरामदे में भी छाता ओढ़कर बैठ रहे हैं बच्चे।
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सरकार और विभागों की मानें तो गांव में बच्चों की बेहतर शिक्षा और सुविधा के लिए करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है। लेकिन असल में स्थिति क्या है इसकी बानगी भर यहां देखी जा सकती है।
तहसील के चार से अधिक प्राइमरी स्कूलों के भवन जर्जर हालात में है। अधिकतर विद्यालयों की छतें टपकने से कमरों में पानी जमा होता है, जिससे बच्चे कमरों के एक कौने में बैठकर पढ़ते है और जिम्मेदार विभाग भवन की मरम्मत के नाम पर पैसा न मिलने की बात कह पल्ला झाड़ रहा है। ग्राम पंचायत भलसों के अंतर्गत प्राइमरी स्कूल सुगढ़ की सबसे अधिक दयनीय स्थिति है। छत टपकने के कारण दोनों कमरों और बरामदे में बरसाती पानी जमा हो जाता है।
तहसील मुख्यालय के प्राइमरी स्कूल के हाल भी ठीक नहीं है। प्रधानाध्यापिका किरन कठैत का कहना है कि छत टपकने के कारण कक्षाएं बरामदे में संचालित की जा रही है। प्राथमिक विद्यालय ढमकर में तो बच्चे भूकंप रोधी छोटे से टीन सेड में बैठते हैं। और प्राथमिक विद्यालय खाल का भी यहीं हाल है। सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रप्रकाश बहुगुणा, विनोद रावत ने बताया कि कई बार विद्यालयों की स्थिति को सुधारने के लिए विभाग को लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
दूसरी ओर आदिबदरी के संकुल प्रभारी महाबीर सिंह बिष्ट ने बताया कि सुगढ़ और आदिबदरी विद्यालय की मरम्मत का आंगणन शासन को भेजा गया है और ढमकर के विद्यालय भवन के निर्माण का अभी आधा पैसा ही उपलब्ध हुआ है।