पर्यटन एवं धार्मिक स्थल वाण के लाटू मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार (आज) विधि विधान से खोल दिए जाएंगे। यहां श्रद्धालु मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं करते, बल्कि मंदिर से 30 मीटर दूर परिसर में ही रहकर पूजा करते हैं।
मंदिर के अंदर केवल पुजारी प्रवेश करता है वो भी आंख पर पट्टी बांधकर। इसी रहस्य और आस्था से यहां हर साल हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। मंदिर समिति ने इस धार्मिक उत्सव की पूरी तैयारियां कर ली हैं। बृहस्पतिवार को यहां ब्रह्ममुहूर्त से लेकर शाम तक धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
वाण गांव हर बारह साल में होने वाली सबसे लंबी पैदल यात्रा श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा का 12वां पड़ाव है। लाटू देवता को मां नंदा का धर्म भाई माना जाता है और वह यात्रा के दौरान वाण से लेकर होमकुंड तक यात्रा की अगुवानी करते हैं।
हर साल बैशाख पूर्णिमा के दिन लाटू देवता मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। ग्रामीण हीरा सिंह ने बताया कि 5 से 7 की संख्या में गांव के लोग, कुल पुरोहित तथा लाटू के पुजारी देव स्तुति करते हैं। यहां से मंदिर में प्रवेश केवल मंदिर के पुजारी आंख पर पट्टी बांधकर ही करते आए हैं।
अगर मंदिर के अंदर पुजारी बिना आंखों पर पट्टी पर बांधकर जाता है तो वहां से एक तेज रोशनी निकलती है जिससे व्यक्ति अंधा हो जाता है। इसलिए यहां पुजारी हमेशा आंखों पर पट्टी पर अंदर जाता है।