बदरीनाथ हाईवे पर नासूर बना करीब चार सौ मीटर लामबगड़ भूस्खलन जोन डेढ़ साल के भीतर नए स्वरूप में दिखेगा। आगामी अक्तूबर माह से भूस्खलन जोन का स्थायी ट्रीटमेंट कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए भारत सरकार से लोनिवि (एनएच) इकाई को 96 करोड़ की धनराशि भी मंजूर हो गई है।
भूस्खलन जोन के ट्रीटमेंट का कार्य दिल्ली की निजी कंपनी करेगी। एनएच अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के मजदूर जनवरी माह में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच भी भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट कार्य करेंगे और डेढ़ साल के भीतर लामबगड़ भूस्खलन मुक्त हो जाएगा।
बदरीनाथ हाईवे धार्मिक ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लामबगड़ में हाईवे के बार-बार बाधित होने से जहां बदरीनाथ धाम की यात्रा प्रभावित हो रही है वहीं चीन सीमा पर चौकसी में लगे जवानों के लिए राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। विगत 22 जून को भारी बारिश से बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में करीब सौ मीटर बह गया था। तब से दो माह के भीतर हाईवे करीब पचास दिन बंद रहा।
हाईवे की दशा सुधारने के लिए वर्ष 2014 में बदरीनाथ धाम के व्यवसायियों और मंदिर के हक-हकूकधारियों ने छह माह तक आंदोलन भी किया था। लामबगड़ में अब हाईवे के सुधरने की आस जगी है। लोनिवि (एनएच) के अधिशासी अभियंता प्रवीन ने बताया कि सितंबर माह के अंत तक निर्माणदायी संस्था लामबगड़ का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर यहां निर्माण सामग्री का भंडारण करना शुरू कर देगी। नदी और चट्टान साइड एक साथ ट्रीटमेंट कार्य शुरू किया जाएगा।
लामबगड़ में जीओ सिंथेटिक कारपेट में उगेगी घास
लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में जीओ सिंथेटिक की कारपेट बिछाई जाएगी, जो भूस्खलन को प्रभावी ढंग से रोक सकती है। कारपेट में हरी घास लगाई जाएगी, जो मिट्टी पर अपनी मजबूत पकड़ बना लेगी। इसके बाद रॉक पर शीर्ष भाग से लेकर आधार तक एंकरिंग की जाएगी। इसमें लंबी-लंबी लोहे की कीलें रॉक के अंदर डाली जाएंगी। भूस्खलन के शीर्ष भाग में कंक्रीट की मोटी दीवार लगाई जाएगी। साथ ही अलकनंदा साइड भी हाईवे की सुरक्षा के लिए आरसीसी वॉल हाईवे की ऊंचाई तक बनाई जाएगी। इससे लामबगड़ में हाईवे करीब बारह मीटर चौड़ा हो जाएगा।
पडग़ासी और लामबगड़ गांवों को है भूस्खलन से खतरा
लामबगड़ भूस्खलन जोन के शीर्ष भाग में पड़गासी और लामबगड़ गांव स्थित है। लगातार भूस्खलन होने से दोनों गांवों को खतरा बना हुआ है। पड़गासी गांव में करीब 25 परिवार निवास करते हैँ, जबकि लामबगड़ गांव में पचास से भी अधिक परिवार हैं।
इस क्षेत्र में बारिश होने के बाद भूस्खलन सक्रिय हो जाता है। जोशीमठ के ब्लॉक प्रमुख प्रकाश रावत का कहना है कि लामबगड़ भूस्खलन जोन के स्थाई ट्रीटमेंट कार्य से ही यहां भूस्खलन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।