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पांडुकेश्वर में भव्य बनेगा कुबेर मंदिर

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बदरीनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर में भव्य कुबेर मंदिर की स्थापना होगी। मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से तराशे पत्थर पांडुकेश्वर पहुंचाए जा रहे हैं। कुबेर भगवान पांडुकेश्वर क्षेत्र के आराध्य देवता है और छह माह तक बदरीनाथ धाम में बदरीश पंचायत (बदरीनाथ गर्भगृह) में पूजे जाते हैं।
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बदरीनाथ धाम से लगभग 18 किलोमीटर पहले पांडुकेश्वर गांव स्थित है। यहां पौराणिक योग ध्यान बदरी मंदिर स्थित है। पांडुकेश्वर में पांच साल के अंतराल में कुबेर महोत्सव आयोजित होता है। तब देश-विदेश के श्रद्धालु यहां कुबेर भगवान के दर्शन और मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर बदरीश पंचायत से कुबेर जी और उद्धव जी की डोली को पांडुकेश्वर लाया जाता है। छह माह तक बदरीनाथ की शीतकालीन पूजा भी यहीं होती है। कुबेर देवरा ग्राम कल्याण समिति के सदस्य अभिषेक पंवार ने बताया कि मंदिर निर्माण में एक करोड़ से अधिक धनराशि खर्च होगी। खाकचौक बदरीनाथ के महंत बालक योगेश्वर दास जी की ओर से मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से पत्थरों की व्यवस्था की जा रही है। वर्ष 2015 में पांडुकेश्वर में कुबेर महोत्सव का आयोजन हुआ था। तब मंदिर समिति और श्रद्धालुओं ने कुबेर भगवान का भव्य मंदिर बनाने का संकल्प लिया था।
कुबेर के ऋणी हैं भगवान बदरीनाथ
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम से कुबेर भगवान का गहरा नाता है। मान्यता है कि बदरीनाथ भगवान भी धन के देवता और देवताओं के खजांची कुबेर के ऋणी हैं। यही वजह है कि प्रति वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर कुबेर जी नारायण से अपना ऋण वसूलने के लिए उनकी पंचायत (बदरीश पंचायत) में विराजमान होते हैं। लोक प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए कुबेर से ऋण लिया था, लेकिन काफी समय बाद भी श्रीहरि कुबेर से लिया गया धन वापस नहीं कर पाए। ऋण की उगाही न होने के कारण कुबेर ने फैसला किया की वे ग्रीष्म ऋतु में यात्राकाल के दौरान बदरीनाथ पहुंचकर भगवान से धन की वसूली करेंगे।
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