मुख्य बस स्टेशन पर कलश साहित्यिक संस्था एवं लोक भाषा साहित्य समिति की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में विभिन्न जगहों से आए कवियों ने स्वरचित कविताओं के माध्यम से पलायन, भ्रष्टाचार, महंगाई पर तंस कसे। सम्मेलन का शुभारंभ संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने किया।
उन्होंने बाघ गीजि बाखरि बटी अर चोर सीखी कखड़ी बटी, मुरली दीवान ने कृष्ण पैदा कन पड़ला, राम पैदा कन पड़ला, जगदंबा चमोला ने तुम्हारी चार लड़दा नी हम दिल्ली, देहरादून मां, झगड़ा ह्वैगी भी त हम, चट ब्वलंदन फोन मां, तेजपाल निर्मोही ने ईमान धरम ही सब कुछ च, सुधीर बर्त्वाल ने हल्या हरची, ढोल हरची, हरच्यां रीति-रिवाज, नंदन राणा ने पुल खाई, पुस्ता खाई, मनरेगा मां अयूं तीन लाखो रस्ता खाई, जय विशाल गढ़देसी ने प्रेम गाथा, डा. शैलेंद्र मैठाणी ने ह्वीस्की रम छै गई पाड़ मां, पीणे की सरम भी गई पाड़ मां, मनमोहन भट्ट ने पलायन और शशि देवली ने कन्या भ्रूण हत्या पर स्वरचित कविता पाठ किया। इस दौरान दर्शकों ने सम्मेलन का देर शाम तक लुत्फ उठाया।