ध्याणियां हुईं भावुक, भक्तों ने अमृत गंगा की परिक्रमा कर कुशलता की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। बहन संतानदायिनी माता अनसूया से विदा लेकर विभिन्न गांवों की ज्वाला और मां भगवती की डोलियां रविवार को अपने मंदिरों के लिए रवाना हो गईं। देव डोलियों की विदाई पर ध्याणियों (विवाहित बेटियां) की आंखें नम हो गईं। मंदिर में पहुंचे भक्तों ने अमृत गंगा की परिक्रमा की और मां अनसूया से परिवार की कुशलता की कामना की। इसी के साथ दो दिवसीय अनसूया मेले का समापन हो गया।
रविवार को सुबह छह बजे मां अनसूया के साथ ही कठूड़, बणद्वारा, खल्ला, देवलधार, सगर गांव की ज्वाला और मां भगवती की डोलियों का शृंगार किया गया। मंदिर के मंडप में हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित की गई और हवन किया गया। मां अनसूया के मुख्य पुजारी डॉ. प्रदीप सेमवाल व अन्य आचार्यगणों ने पूजाएं कीं। इसके बाद सुबह 10 बजे भक्तों के साथ ज्वाला देवी की डोली अत्रिमुनि आश्रम पहुंची। यहां अमृत गंगा में पवित्र स्नान करने के बाद मां की डोली की विशेष पूजाएं हुईं। भक्तों ने भी अमृत गंगा की परिक्रमा की। अनसूया मंदिर में भोग लगने और हवन के बाद अपराह्न तीन बजे सभी डोलियों ने बहन अनसूया से विदा ली और अपने-अपने मंदिरों के लिए रवाना हुईं। इस मौके पर अनसूया ट्रस्ट के अध्यक्ष भगत सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष सुनील बिष्ट, सचिव सुदर्शन तोपाल, हरेंद्र नेगी, वीरेंद्र सिंह राणा, शिव प्रसाद सेमवाल, सर्वेंद्र बिष्ट, पुष्कर सिंह बिष्ट, दिनेश सेमवाल, राकेश, प्रदीप, हेमेंद्र बिष्ट, शिशुपाल बर्त्वाल आदि मौजूद रहे।
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347 बरोहियों ने संतान कामना के लिए किया जागरण
गोपेश्वर। मंदिर में पहुंचे 347 बरोहियों (निसंतान दंपती) ने संतान कामना के लिए जागरण किया। शनिवार को देव डोलियों को अलग-अलग स्थानों पर विराजमान करने के बाद एक-एक करके बरोहियों को अनसूया मंदिर के मंडप में बैठाया गया। इसके बाद उनकी संकल्प पूजा हुई। मान्यता है कि जागरण के दौरान महिलाओं को झपकी आते ही मां अनसूया अलग-अलग रूपों में उनके सपने में आती हैं। जिस भी बरोही को सपना आता है वह रात को मंडप से उठकर बाहर आ जाती हैं। सपने में छोटी बच्ची दिखने को बेहद शुभ माना जाता है। संवाद