ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक बनने वाली बहुप्रतीक्षित रेल लाइन की जद में करीब 19000 पेड़ आएंगे, जिसके लिए वन विभाग ने प्रशासन की ओर से संयुक्त सर्वे शुरू किया है। यही नहीं रेल लाइन निर्माण से निकलने वाले मलबे को 31 स्थानों पर डंप किया जाएगा।
जहां रेल विकास निगम प्लांटेशन सहित अन्य कार्य कर संबंधित भूमि को वन विभाग, सिविल, वन या वन पंचायत को हस्तांतरित करेगा। अफसरों की मानें तो एक माह में पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
नौ नवंबर 2011 में गौचर में रेल लाइन के शिलान्यास के बाद से यह प्रक्रिया शुरू हुई। इसके तहत ऋषिकेश से कर्णप्रयाग और पोखरी के सिवाई गांव तक बनने वाली 125 किमी लंबी रेल लाइन के लिए 496 हेक्टेयर वन भूमि रेल विकास निगम को हस्तांतरित होनी है।
इसमें 329 हेक्टेयर भूमि भूमिगत है। चमोली के एडीएम और रेल लाइन मामलों की जिम्मेदारी देख रहे डा. एके बर्नवाल ने बताया कि 125 किमी लंबी रेल लाइन में 105 किमी लाइन भूमिगत होने से भारी मात्रा में मलबा निकलेगा।
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 31 स्थानों को मलबा निस्तारण को लिए चयनित किया गया है। रेल विकास निगम के संयुक्त महाप्रबंधक सुमित जैन के अनुसार सिवाई तक 12 स्टेशन बनेंगे।
पूरी रेल लाइन को 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार का ट्रैक तैयार किया जा रहा है, जिसके चलते ऋषिकेश से सिवाई तक सीधी सर्विस से महज डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वन विभाग के कंजरवेटर एमएस नेगी ने कहा यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले एक माह में रेल लाइन संबंधी पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी।