मां नंदा के सिद्घपीठ कुरुड़ में पूजा-अर्चना करते नंदा भक्ता।
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जय मां नंदा के जयकारों के साथ बुधवार को सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में मां नंदा की लोकजात का श्रीगणेश हो गया है। विधिविधान से पूर्वाह्न ग्यारह बजे दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में प्रतिष्ठापित की गई। 23 अगस्त को मां नंदा की डोलियां कैलाश के लिए प्रस्थान करेंगी। वहीं, कुरुड़ गांव में तीन दिवसीय मां नंदा लोकजात मेला भी शुरू हो गया है।
लोकजात में बधाण और दशोली की मां नंदा की डोलियां विभिन्न पड़ावों से होते हुए पांच सितंबर को नंदा सप्तमी के दिन पूजा अर्चना के बाद अपने-अपने क्षेत्रों के लिए प्रस्थान करेंगी। बधाण की मां नंदा वेदनी बुग्याल में पूजा अर्चना के बाद छह माह के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा में विराजमान हो जाएंगी। बुधवार को सुबह छह बजे से ही सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में मां नंदा की विशेष पूजाएं संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी योगेश्वर प्रसाद, विजय प्रसाद, रमेश और लक्ष्मी प्रसाद ने गणेश पूजा के बाद मां नंदा का आह्वान किया। दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियों पर शक्ति चढ़ाई गई। पूर्वाह्न ग्यारह बजे दोनों डोलियां गर्भगृह से मंडप में प्रतिष्ठापित की गई। इस दौरान मां नंदा और भूमियाल देवता ने अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर मंदिर में मौजूद अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया।
इधर, कुरुड़ गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकजात सांस्कृतिक मेला भी शुरू हो गया है। मेले का शुभारंभ विधायक प्रतिनिधि भरत सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान शिशु मंदिर, विद्या मंदिर, हिमालय चिल्ड्रन एकेडमी, नवज्योति चिल्ड्रन एकेडमी और एसजीआरआर घाट के छात्र-छात्राओं ने लोकगीत ‘नंदा तेरी जात कैलाश लिजौला सजी-धजीक..’, ‘कुरुड़ की नंदा तू दैंणी ह्वै जा..’, ‘चार दिन स्वामीजी में मैतुड़ा जयोलू..’ जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर राजेश गौड़, सुखवीर रौतेला आदि मौजूद थे। मेले का संचालन प्रकाश गौड़ ने किया। इस दौरान बाबा योगेंद्र द्वारा रचित नंदा धाम पुस्तक का विमोचन भी हुआ।
टेरिटोरियल बटालियन ने अर्पित की 51 किलो की घंटी
घाट। क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण में लगी सेना की टेरिटोरियल बटालियन की ओर से सिद्धपीठ कुरुड़ में 51 किलो की घंटी अर्पित की गई। पूजा-अर्चना के बाद यह घंटी मंदिर के मुख्य द्वार पर लगाई गई। इससे पूर्व भी सत्तर के दशक में गढ़वाल राइफल की ओर से मां नंदा के मंदिर के प्रवेश द्वार पर 51 किलो की घंटी लगाई गई थी। ब्यूरो