चमोली जिले के बमोथ गांव में 60 साल पहले बनाई गई सिंचाई नहर देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गई है। ऐसे में करीब एक हजार खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है। वहीं, यहां लगा नलकूप भी खराब पड़ा है।
बमोथ गांव में 350 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां के खेतों में उगाई जाने वाली धान की फसल पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध मानी जाती है। 10 साल पहले सरमोला-रानों सड़क बनने के बाद गांव की सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। हालांकि सिंचाई विभाग ने नहर की मरम्मत करवाई, लेकिन गुणवत्ता के अभाव में नहर बदहाल होती गई। उसके बाद विभाग ने नहर के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया। वर्तमान में हालत यह है कि नहर में लोगों के घरों का दूषित पानी जमा हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहर मरम्मत के लिए कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। जिससे बमोथ गांव में खेती करने वाले रानों, सूगी, गडना, बमोथ, झिरकोटी, गलनाऊं के काश्तकार मायूस हैं। ग्राम प्रधान पूनम देवी, क्षेपंस विजयलक्ष्मी चौधरी, धीरेंद्र चौधरी, जितेंद्र मल्ल, प्रदीप लखेड़ा ने तुरंत नहर ठीक करने की मांग की है।
वहीं, सिंचाई विभाग चमोली के जेई दिनेश चंद्र ने कहा कि समय-समय पर विभाग की ओर से नहर की मरम्मत की जाती है। फिर से नहर को दुरस्त करने के प्रयास किए जाएंगे।