मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना को विभागीय अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। योजना के तहत उर्गम घाटी में एक युवा ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर सोलर प्लांट स्थापित किया गया लेकिन उरेडा और ऊर्जा निगम की ओर से अभी तक प्लांट से उत्पादित होने वाली बिजली को ग्रिड से नहीं जोड़ा गया है जिससे लाभार्थी को प्रतिमाह करीब 15 हजार रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
वर्ष 2020 में राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना शुरू की गई। इसके तहत स्थानीय को स्वरोजगार दिया जाना था। इस योजना के तहत उर्गम घाटी के देवग्राम गांव निवासी रघुवीर सिंह नेगी ने 20 किलोवाट के सोलर प्लांट के लिए इसी वर्ष मार्च माह में जोशीमठ में पंजाब नेशनल बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लिया। गांव में ही निजी भूमि पर सोलर प्लांट स्थापित किया लेकिन छह माह बाद भी इस प्लांट को ग्रिड से नहीं जोड़ा गया है। इस कारण इससे बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है। रघुवीर सिंह नेगी का कहना है कि प्लांट संचालित न होने से उन्हें प्रतिमाह 15 हजार रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्रतिमाह आठ हजार रुपये बैंक की किश्त भरनी पड़ रही है।
- लाभार्थी की ओर से इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर रुड़की से प्लांट की सेफ्टी रिपोर्ट जमा कराई जानी थी। उन्हें कई बार इस संबंध में अवगत कराया गया तो अब सेफ्टी रिपोर्ट मिल गई है। शीघ्र प्लांट चालू कर लिया जाएगा। - सौरभ कुमार, परियोजना अधिकारी, उरेड़ा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण)।
- उरेडा विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण करने के बाद ऊर्जा निगम को प्लांट को ग्रीड से जोड़ने की अनुमति दी जाती है। हमें उरेडा से संस्तुति मिल गई है, जल्द ही प्लांट को ग्रीड से जोड़ दिया जाएगा। - अमित सक्सेना, ईई, ऊर्जा निगम।