गोपेश्वर। यूनेस्को और जनदेश स्वैच्छिक संगठन की ओर से एक दिवसीय मौन पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित किया गया।
उर्गम घाटी के तल्ला बड़गिंडा गांव में हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनदेश के सचिव लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उर्गम घाटी के गांवों में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं। प्रकृति में विद्यमान जैव विविधता को बचाने में मधुमक्खी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज के समय में मधुमक्खी को आवास उस के अनुरूप नहीं मिल पा रहा है। भवन शैली निर्माण की प्रक्रिया बदलने के कारण उनके आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। लोगों को मधुमक्खी पालन बॉक्स, क्वीन गेट, बकछुट थैला, स्मोकर, मुंह की जाली, दस्ताने, शहद काटने के औजार और मधुमक्खी पालन में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया गया। इस मौके पर ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह रावत, विरेंद्र लाल, जयचंद डुंगरियाल, दीपक चंद्र, अनीता देवी, सूरमा देवी, विमला, जमुना, करीना, बदरी सिंह, सुभाष और दिव्य प्रकाश आदि मौजूद रहे। संवाद