सिमली में संचालित दुग्ध संघ कर्मियों को 15 माह से वेतन नहीं मिल पाया है। आर्थिक संकट से परेशान कर्मी जहां प्रबंधन को इसका दोषी मान रहा है वहीं प्रबंधन कर्मी कमाई न होना बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि अफसरों ने संघ से मोबाइल के बिल में भी बढ़ोत्तरी कर दी है, लेकिन कर्मियों के वेतन के नाम पर घाटा होने की बात कह रहा है।
दुग्ध संघ में तैनात पीएन पंत, विजेंद्र सिंह, डबल सिंह, एसपी थपलियाल, बीबी कोठियाल, मोहन लाल, रोशन ला, सचिन गैरोला, अनीता देवी, मधु कुंवर और कांता बिष्ट ने कहा कि 15 महीनों से घाटे के नाम पर कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है, जबकि संघ की ओर से प्रबंधक और अध्यक्ष के मोबाइल के खर्चे में 200 रुपये बढ़ोत्तरी करते हुए 1000 रुपये कर दिया गया है।
कर्मियों का कहना है कि यदि दुग्ध संघ में उपार्जन नहीं हो रहा है तो संघ की ओर से दो डॉक्टरों की तैनाती क्यों की गई। उन्हें जिला योजना के मद से 26 हजार और संघ के मद से 3 हजार प्रति माह दिया जा रहा है। अन्य कर्मियों को न संस्था के मद से दिया हा रहा है और न जिला योजना के मद से। ऐसे में संघ कर्मियों से काम भी ले रहा है और वेतन देने के नाम पर घाटे की बात कह मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न कर रहा है।
40 रुपये प्रति लीटर बिक रहा दूध
एक दिसंबर से आंचल दुग्ध संघ सिमली ने दूध के दामों में बढ़ोत्तरी करते हुए 40 रुपये प्रति लीटर कर दिया है जबकि यह पहले 36 रुपये था। प्रबंधन की मानें तो अभी जिले में करीब 1250 लीटर दूध ही बिक पाता है, जिसका इतना लाभांश नहीं आ पा रहा है कि कर्मियों का वेतन दिया जाए।
दुग्ध संघ में तैनात कर्मी दूध का विपणन नहीं कर पा रहे हैं। नियमानुसार दूध बेचकर होने वाले फायदे से कर्मियों को वेतन दिया जाता है, लेकिन जब लाभ ही नहीं होगा वेतन किस मद से दिया जाएगा। वहीं नियमानुसार ही डॉक्टरों को संस्था से 3 हजार और प्रबंधक तथा अध्यक्ष को 200 रुपये अतिरिक्त मोबाइल बिल का दिया जा रहा है। - एनएस डुंगरियाल, सहायक निदेशक दुग्ध संघ सिमली, चमोली।