निजमुला घाटी के ईराणी गांव में पांच माह से क्षतिग्रस्त पड़ी बिजली लाइन को ग्रामीणों ने स्वयं जोड़ा और चार दिनों में गांव में बिजली पहुंचा दी। जब प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने स्वयं बिजली सुचारु करने का फैसला लिया। कुछ ग्रामीणों ने बिजली के खंभे गाड़े तो कुछ ने बिजली के तार खींचे।
ईराणी गांव में करीब 180 परिवार रहते हैं। एक जुलाई को भनाली और ईराणी गांव के बीच ईराणी सड़क के किनारे भूस्खलन से बिजली के तार और पोल ध्वस्त हो गए थे। ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने पीएमजीएसवाई पोखरी को बिजली लाइन ठीक करवाने के लिए पांच लाख का इस्टीमेट भेजा, लेकिन पीएमजीएसवाई के अधिकारी बजट की कमी बताते रहे।
दोनों विभागों के बीच बजट पर फंसी बिजली लाइन दुरुस्त नहीं होने पर ग्रामीणों ने डीएम से इसकी शिकायत की, लेकिन फिर भी बिजली सुचारु नहीं हुई। पांच माह तक ग्रामीणों ने दिक्कतें झेली और अब प्रशासन का मुंह ताकने के बजाय स्वयं ही बिजली लाइन ठीक करने का निर्णय लिया।
गांव के 25 से अधिक ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पड़े बिजली के खंभे और तार को स्वयं के संसाधनों से जोड़ा। इसके बाद ऊर्जा निगम से वार्ता करके बिजली सुचारु करवाई। ग्रामीण मोहन सिंह नेगी का कहना है कि ग्रामीणों ने चार दिनों में गांव में बिजली पहुंचा दी। ईराणी गांव के पूर्व प्रधान भजन सिंह का कहना है कि दूरस्थ गांवों में सुविधाएं देने के सरकार के दावे धरातल पर उतर नहीं पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की ओर अधिकारी लापरवाह रवैया अपनाते हैं।
पीएमजीएसवाई को बिजली लाइन ठीक करवाने के लिए पांच लाख का इस्टीमेट दिया गया है। डीएम के माध्यम से भी विभाग को नोटिस भेजा गया, लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है। बजट मिलते ही लाइन का सुधारीकरण किया जाएगा। - धनंजय कुमार, एसडीओ, ऊर्जा निगम, चमोली।
ऊर्जा निगम के इस्टीमेट की जांच की जा रही है। हमारे पास फिलहाल बजट का अभाव है। उच्च अधिकारियों को भी समस्या से अवगत कराया गया है। जैसे ही बजट मिलेगा, तो ऊर्जा निगम को दे दिया जाएगा। - आरपी सिंह, ईई, पीएमजीएसवाई, पोखरी।