सिमली में 750 नाली भूमि पर बनना था औद्योगिक क्षेत्र, दस ही लग पाए उद्योग
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। नगर के सिमली मेंं 750 नाली भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए नब्बे के दशक में भूमि आवंटित की गई थी। राज्य बनने के बाद यह क्षेत्र सिडकुल के संरक्षण में आया, लेकिन उद्योगों ने रफ्तार नहीं पकड़ी। जिससे यहां लोगों ने उद्योगों के बजाए घर बना दिए। इससे नाराज सिडकुल प्रबंधन ने अब नोटिस देना शुरू कर दिया है।
जनपद चमाेली के औद्योगिक परिक्षेत्र सिमली में उद्यमों के नाम पर चार दशक पूर्व लाखों की लागत से स्थानीय लोगों से औने पौने दामों पर जमीन खरीदी थी। स्थानीय महेश डिमरी, अरुण डिमरी, कमलेश डिमरी, संजय डिमरी आदि ने बताया कि नब्बे के दशक में मज्याडी गांव के ग्रामीणों ने लगभग 750 नाली उपजाऊ भूमि यूपीएसआईसीडीसी को दी थी। शासन प्रशासन और उद्याेग विभाग की ओर से स्थानीय उद्यमियों को लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि आवंटित की गई थी।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सरकार ने औद्योगिक परिक्षेत्र सिमली का जिम्मा सिडकुल प्राधिकरण को दे दिया था, लेकिन प्राधिकरण की उदासीन कार्यप्रणाली से आवंटित भूमि में लघु एवं कुटीर उद्योगोंं की स्थापना बहुत कम हो पाई। वर्तमान में यहां करीब दस उद्योग चल रहे हैं। जबकि 15 से अधिक भूखंडों में घर बनने की शिकायत सिडकुल के सामने आई है। ऐसे में सिडकुल ने क्षेत्र का निरीक्षण कर उद्योग नहीं लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक गिरधर सिंह रावत ने बताया कि औद्योगिक परिक्षेत्र सिमली मे मानकों के विपरीत हो रहे कार्याैं को चिन्हित किया जा रहा है। घर बनाने वालों की सूची बनाकर नोटिस दिए जा रहे हैं। यदि उद्योग नहीं लगाए गए तो संबंधित लोगों से भूमि वापस ली जाएगी।