पीजी कॉलेज गोपेश्वर में ‘सतत विकास की चुनौतियां और रणनीति’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ। सेमीनार का शुभारंभ करते हुए श्री देवसुुमन राज्य विवि के कुलपति डा. यूएस रावत ने कहा कि हिमालय और उसके पारिस्थितिकीय तंत्र की अनदेखी कर उत्तराखंड का विकास संभव नहीं है। राज्य की पारंपरिक जीवन शैली और तरीकों को विज्ञान के साथ जोड़कर ही राज्य का सतत विकास किया जा सकता है।
शुक्रवार सुबह साढे़ दस बजे पीजी कॉलेज के जिमनेजियम हॉल में श्री देव सुमन राज्य विश्व विद्यालय के कुलपति डा. यूएस रावत ने दीप प्रज्जवलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। महाविद्यालय के एनसीसी कैडेटों ने देश और विदेश के विभिन्न विश्व विद्यालय से आए अतिथियों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। सेमिनार के प्रथम सत्र में महाविद्यालय प्राचार्य ने स्वागत भाषण व सेमिनार की विषय वस्तु प्रस्तुत की। द्वितीय सत्र में यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. राजेंद्र डोभाल ने ‘सतत विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व’ विषय पर जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय आर्थिक परिषद के महासचिव डा. अनिल कुमार ठाकुर, प्रोफेसर बीपी चंद्रमोहन व सेमिनार की संयोजक डा. भारती पांडे ने सतत विकास के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। इस दौरान कार्यक्रम की आयोजक सचिव डा. अनुमिता अग्रवाल, डा. एलएम पांडेय, डा. दर्शन नेगी, डा. अखिलेश कुकरेती, डा. अरविंद अवस्थी, डा. गीता रावत और डा. सरिता चौहान आदि मौजूद थे।
नहीं पहुंचे अर्थशास्त्री
सेमिनार में बांग्लादेश, इथोपिया, नेपाल, मॉरिशस, बर्मा और सिंगापुर सहित विभिन्न संस्थानों के अर्थशात्रियों को इस सेमिनार में शामिल होना था लेकिन वह नहीं आ सके। उन्होंने अपने शोध पत्र यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. राजेंद्र डोभाल को भेज दिए थे, जिसे डा. डोभाल ने सेमिनार में पढ़ा।