सीमांत चमोली जनपद वीर सैनिकों के साथ ही शिक्षकों की फौज खड़ी करने में भी पीछे नहीं है। जिले के घाट ब्लाक का सैंती गांव इसका उदाहरण है। साठ परिवारों वाले इस गांव के 26 शिक्षक विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कई ग्रामीण शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जिले का दूरस्थ गांव होने के बावजूद सैंती गांव के ग्रामीण शिक्षा के प्रति जागरूक रहे हैं। 75 वर्षीय ग्रामीण हीरामणी मैंदुली बताते हैं कि गांव में वर्ष 1997 में प्राइमरी स्कूल की स्थापना हुई थी। इससे पहले गांव के बच्चे पढ़ाई के लिए पांच किमी की पैदल दूरी तय कर प्राथमिक विद्यालय फाली और सरपाणी जाते थे।
आज गांव के ग्रामीण प्राथमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों और सेना के शिक्षण संस्थानों में भी कार्यरत हैं। गांव के गोपालदत्त सती का पूरा परिवार शिक्षा के लिये समर्पित है। गोपालदत्त परिवार से पहले शिक्षक बने। इसके बाद इनके तीनों पुत्र भी शिक्षक बने और अब उनके दो पोते और एक पोती भी शिक्षक बनकर परिवार की परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं।